कस्साबान मोहल्ले में बंदरों के हमले से युवक छत से पड़ोस के खंडहर में जा गिरा। दो घंटे तक वह खंडहर में तड़पता रहा। थोड़ी देर बाद परिजनों को जब पता चला तो वह उसे डॉक्टर के यहां ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
कस्साबान निवासी राममनोहर मिश्रा का बेटा रोहित मिश्रा (24) गुरुवार सुबह छत पर बंदर भगाने गया था। छत पर बैठे बंदरों ने उस पर हमला बोल दिया। इससे वह पड़ोस के खंडहर में जा गिरा और घायल हो गया। मोहल्लेवासियों के मुताबिक वह घायलावस्था में खंडहर में करीब दो घंटे तक पड़ा रहा और परिजनों को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। काफी देर तक जब वह छत से नहीं आया तो परिजन उसे बुलाने गए।
परिजनों ने छत से खंडहर में देखा तो रोहित खून से लथपथ पड़ा था। आनन-फानन उसे प्राइवेट चिकित्सक के यहां ले जाया गया। वहां डाक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी है।
हादसों के बाद भी पालिका खामोश
शहर में बंदरों के हमले से आयेदिन लोगों के घायल होने और मरने की घटनाएं हो रही हैं। इसके बाद भी नगरपालिका प्रशासन खामोश है। अभी तक बंदरों को पकड़वाने के लिए पालिका प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। शहर में बंदरों का इस कदर आतंक हैं कि लोग छतों पर जाने से घबराते हैं।
काजी हाउस की जगह बना नेहरू सदन
शहर में आवारा जानवरों को पकड़कर बंद करने के लिए काजी हाउस बना था। लेकिन नगरपालिका ने उसे तुड़वाकर नेहरू सदन के नाम से मार्केट बना दिया गया।
क्या कहते जिम्मेदार
बंदरों को पकड़वाने के लिए वह नगरपालिका बोर्ड की बैठक में इसका प्रस्ताव पास कराएंगे। बंदरों के हमले की लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
- सुरेंद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका परिषद, छिबरामऊ