जलालाबाद (कन्नौज)। जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित कारागार में बंदियों की निगरानी भगवान भरोसे है। जेल के चारों कोनों पर वॉच टॉवर तो बनाए गए हैं, पर उनमें कोई नहीं जाता है। यही वजह है कि 22 फीट ऊंची दीवार पर कंबलों से बनी रस्सी के सहारे दो विचाराधीन बंदी भाग और जेल प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। योजनाबद्ध तरीके से बंदी भागे हैं, इसकी कहानी वह रस्सी बता रही है जो कंबलों और बिछाने वाली चादरों समेत पौधों की टहनियों को लपेटकर बनाई गई थी।
रविवार रात को जेल परिसर में नए साल का जश्न चल रहा था। जेल अधिकारी और कर्मचारी परिवार के सदस्यों के साथ डीजे की धुन पर थिरक रहे थे और गाने गा रहे थे। इस दौरान जेल के कैदियों पर किसी का ध्यान नहीं गया। कैदियों ने इसी मौके का लाभ उठाते हुए जेल के अंदर से कंबलों को इकट्ठा किया और उन्हें आपस में जोड़कर एक मजबूत रस्सी तैयार की। इस रस्सी के सहारे वह जेल की करीब 22 फीट ऊंची पूर्वी दीवार पर चढ़ गए और कूदकर बाहर निकल गए। रात में कैदियों की गिनती नहीं की गई थी, जिसका फायदा भी उन्हें मिला। जेल में पार्टी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसकी संवाद न्यूज एजेंसी पुष्टि नहीं करती है। हालांकि जेल प्रशासन वीडियो पुराना बता रहा है। अन्य कैदियों ने डीएम व एसपी को बताया कि वॉच टॉवरों कोई भी नहीं रहता है। साल भर ये खाली रहते हैं। डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता को भी यही बात बताई गई है। इसी आधार पर जेल अधीक्षक की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है। -
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सुबह गिनती में खुला राज, मचा हड़कंप
सोमवार सुबह करीब 10 बजे जब जेल के सभी कैदियों और बंदियों को बैरकों से बाहर निकाला गया और उनकी गिनती शुरू हुई, तब दो कैदियों के कम होने का पता चला। जेल प्रशासन ने पहले इस मामले को छिपाने की कोशिश की और अपने स्तर पर कैदियों की तलाश जारी रखी। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री व एसपी विनोद कुमार को इस घटना की जानकारी मिल गई। वह संपूर्ण समाधान दिवस बीच में छोड़कर सीधे जिला पहुंचे और प्रारंभिक जांच कर सूचना शासन को दी।
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का करूं सजनी आए न बालम...गीत पर झूमे लोग
दो विचाराधीन बंदियों के फरार होने के बाद जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह जेल के अंदर पार्टी में माइक पर स्वर लहरियां बिखेरते दिख रहे हैं। इसमें वह का करूं सजनी आए न बालम...ठुमरी सुनाकर तालियां बटोर रहे हैं। इसके अलावा डीजे की धुनों पर बंदी रक्षक व अफसर थिरक रहे हैं। खास बात यह है कि जश्न के सभी वीडियो जेल अधीक्षक ने अपने व्हॉट्स एप स्टेटस पर अपलोड किए हैं। दावा किया जा रहा है कि डीजे बजाकर पार्टी की गई थी, जिसकी जानकारी बंदियों को पहले से थी और उन्होंने इसी का फायदा उठाने की योजना बनाई। वहीं, जेल अधीक्षक का कहना है कि यह वीडियो दो दिन पुराना है।
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पैसा दो...जेल में मिलेगी हर सुविधा
जिला कारागार का हाल यह है कि यहां बंदियों और कैदियों को सिर्फ पैसा खर्च करना पड़ता है, हर सुविधा मिल जाती है। बताया जा रहा है कि यहां नए बंदियों की मशक्कत काटने के लिए 25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। पहले जेल अधीक्षक अकरम खान के समय पांच हजार रुपये लिए जाते थे, लेकिन जब से भीमसेन मुकुंद आए हैं, तब से यह बढ़ा दी गई। इतना ही नहीं जेल के अंदर पान मसाला, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट व शराब की सप्लाई भी पैसे लेकर हो रही है। इसके लिए बंदियों व कैदियों से दोगुने दाम तक वसूल किए जा रहे हैं। कैंटीन में खाने के नाम पर भी वसूली हो रही है।
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मां-बाप का साया छिना तो अपराध की दुनिया में आया अंकित
तालग्राम। क्षेत्र के हाजिरपुर निवासी फरार बंदी अंकित (24) के पिता प्रेमचंद्र मानसिक रूप से बीमार होने से दस साल पहले लापता हो गए थे। अभी तक वह घर वापस नहीं लौटे। दस वर्ष की उम्र छोटी बहन को लेकर मां भी कहीं चली गई। गांव बालों ने बताया कि परिवार के लोगों ने भी संबंध तोड़ लिया। इससे कम उम्र में इधर-उधर भटकने लगा। पिता की जमीन को किराये पर देकर मौज मस्ती करने लगा। इस दौरान वह गलत संगत में पड़ गया। ठठिया थाना पुलिस ने 20 दिसंबर 2025 को तमंचा कारतूस और चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार किया। उसने तीन दिसंबर को औसेर क्षेत्र से धान लदी पिकअप चोरी कर धान बेचना कबूल किया था। सात नवंबर को गुरुग्राम राजेंद्र पार्क से कार चोरी का भी आरोप लगा था। 21 दिसंबर को जेल भेजा गया और पांच जनवरी को जेल से फरार हो गया। थानाध्यक्ष ध्यानेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जेल से फरार आरोपी को गांव में दबिश दी गई है। जानकारी में आया है कि वह कहीं बाहर रह रहा है। गांव से कोई खास वास्ता नहीं है। पुलिस के अनुसार जमीन आरोपी अंकित के पिता के नाम होने के कारण बिक्री नहीं कर सका। जबकि कुछ साल पहले मकान बेच दिया है। ठठिया क्षेत्र निवासी नाना के यहां बचपन रहा है।
पिता की मौत के बाद आवारा हो गया था डिंपी
ठठिया। मलगवां गांव निवासी फरार बंदी शिवा उर्फ डिंपी (25) पिता की मौत के बाद आवारा हो गया था। उस पर किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप था। करीब छह महीने पहले आरोपी युवक सदर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी को अपने साथ लेकर चला गया था। किशोरी के अचानक लापता होने पर परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर सदर कोतवाली में युवक के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश पर आरोपी को अगस्त माह में जिला जेल भेज दिया गया था। परिजनों के अनुसार आरोपी डिंपी उर्फ शिवा के पिता भजन लाल की लगभग 20 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद से वह अपनी मां कमला देवी और बड़े भाई हरिश्चंद के साथ गांव में रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है। उसका बड़ा भाई मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है।
जिला कारागार में 13 बैरक और 443 बंदी
-पेज वन की खबर का इनसेट
जिला कारागार में 13 बैरक और 443 बंदीकन्नौज। जिला कारागार में 13 बैरक हैं, जिनमें 12 पुरुष बैरक और एक महिला बैरक है। इस समय जेल में 431 विचाराधीन बंदी हैं तो 78 सजायाफ्ता कैदी हैं। 12 महिलाएं भी बंद हैं। एसपी विनोद कुमार ने बताया कि जेल में 800 बंदियों और कैदियों को रखने की क्षमता है। इसके सापेक्ष अभी बंदियों की संख्या काफी कम है। फरार बंदियों को पकड़ने के लिए छह टीमों का गठन किया गया है। एसओजी व सर्विलांस टीम को भी लगाया गया है। वहीं, गुरसहायगंज कोतवाली में जेलर विनय प्रताप सिंह ने फरार बंदी अंकित कुमार व शिवा उर्फ डिंपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है।