नोटबंदी के बाद ग्रामीणों ने पुराने नोट हटाने के चक्कर में घरों में पेट्रोल और डीजल का स्टाक लगा लिया है। यह स्टाक कभी भी बड़ा कहर बरपा सकता है। जरा सी लापरवाही में पूरा गांव पल भर में ही तबाह हो सकता है। ट्रैक्टर और इंजन मालिकों ने तो घरों में कई-कई ड्रम और केन में डीजल भरकर रख लिया है। नोटबंदी के बाद बिक्री ने तो सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
हजार-पांच सौ के नोटों को समय रहते खपाने और किसी कार्रवाई से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने डीजल और पेट्रोल की खरीद पर दांव खेला है। गांवों में अधिकांश घरों में दोपहिया वाहनों के अलावा ज्यादातर ट्रैक्टर और डीजल इंजन हैं। नोटबंदी के फरमान के बाद शहरी लोगों के साथ ही किसानों में भी इसकी हलचल देखने को मिली है।
भले ही यह फरमान काफी समय बीत गया हो, लेकिन आज भी बैंकों के बाहर अधिकतर ग्रामीण और किसान ही पुराने नोट जमा करने के लिए लाइनों में लगे देखने को मिल सकते हैं। ज्यादातर ग्रामीणों ने डीजल और पेट्रोल खरीद लिया है। लोगों की मानी जाए तो यह स्टाक जरा सी लापरवाही में पूरे गांव को पल भर में ही तबाह कर सकता है।
ऐसे बढ़ी डीजल-पेट्रोल की बिक्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आठ नवंबर को बड़े नोट बंद करने के फरमान के बाद से 24 नवंबर तक पेट्रोल-डीजल की खरीद पर हजार-पांच सौ के नोट लेने की बात कही गई थी। पेट्रोल पंप स्वामी ने बताया कि आठ नवंबर को उनके यहां 81 सौ लीटर डीजल और 22 सौ लीटर पेट्रोल की बिक्री हुई थी। नोटबंदी के फरमान के अगले दिन नौ नवंबर को डीजल की बिक्री बढ़कर 11800 ली. और पेट्रोल 43 सौ लीटर पहुंच गया था। 24 नवंबर तक बड़े नोट लेने के आदेश थे। ऐसे में उस दिन बिक्री ने सभी रिकार्ड ध्वस्त कर दिए थे। 24 नवंबर को 17000 ली. डीजल और 35 सौ लीटर पेट्रोल की बिक्री हुई थी। लगभग यही हाल सभी अन्य पेट्रोल पंपों का रहा होगा।