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कद्दू की फसल पर बीटल कीट का खतरा

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तालग्राम(कन्नौज)। कद्दू (काशीफल) की फसल में तापमान में गड़बड़ी से बीटल कीट का प्रकोप है। इससे किसान परेशान हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने कीट नियंत्रण के लिए सुझाव दिए हैं।
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तालग्राम इलाके में इस बार करीब तीन हजार बीघा में कद्दू की फसल की गई है। फसल में बीटल और मक्खी कीट नुकसान पहुंचाते हैं। खेत में अधिक नमी या उचित तापमान न होने से इस कीट का प्रकोप ज्यादा होता है। फसल को भूरी मक्खी, बीटल, बग, लाल भृंग, चैंपा, फुदका नुकसान पहुंचाते हैं। कृषि प्राविधिक सहायक (ताहपुर) विनय कुमार शर्मा ने बताया कि यह कीट कद्दू की पत्तियों की ऊपरी सतह को खाते हैं। इससे पत्तियां जालीदार हो जाती हैं। प्रकोप बढ़ने पर कद्दू की बेल की पत्तियों में केवल नसें दिखती हैं। इससे बेल का विकास रुक जाता है। फूल और फल नहीं लगते हैं।
फसल का ऐसे करें बचाव
कद्दू की बेल को बीटल कीट से बचाने के लिए ट्रायजोफास 60 मिली या थाईक्लोप्रिड 21.7% एससी 60 मिली प्रति बीघा 40 लीटर पानी मे घोलकर छिड़काव करें। फल लगते समय रसायनिक दवाओं की बजाय जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें। कद्दू की खेती करने वाले माधौनगर के श्रीकृष्ण पटेल, संजय कुमार, गदनापुर के खून्नूलाल, ताहपुर के वीरेंद्र सिंह, अतरौली के ओमप्रकाश ने बताया कि इस समय कद्दू की फसल पर कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है।
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कद्दू की फसल में लगने वाले रोग और कीट
जड़ गलन रोग : यह रोग फफूंदी से फैलता है। इसमें जड़ गल जाती है। बेल पीली हो कर सूख जाती है।
झुलसा ब्लाइट: इसमें पत्तियों पर धब्बे बन जाते हैं। धीरे-धीरे फसल नष्ट हो जाती है।
हरा तेला, मक्खी, लाल भृंग : यह रस चूसक कीट हैं। यह भी नुकसान पहुंचाते हैं।
फल विगलन रोग: यह फफूंदी जनित रोग है। इससे फल गलने लगता है।
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