कन्नौज। धान की कटाई शुरू हो गई हे। साथ ही खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर प्रशासन ने सख्ती करनी शुरू कर दी है। डीएम के निर्देश पर कृषि और पुलिस विभाग के अधिकारी लगातार निगरानी में जुटे हैं। खेत में पराली जलाने वाले किसानों पर अब उनके खेत के रकबे के अनुसार जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना पांच से लेकर 30 हजार रुपये तक हो सकता है। इसकी निगरानी के लिए कृषि विभाग ने टीम गठित कर दी है। साथ ही सरकार ने जुर्माना राशि भी बढ़ा दी है।
जिले में कृषि विभाग की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके साथ ही होर्डिंग, पंपलेट वितरण, प्रचार वाहनों और गोष्ठियों के माध्यम से किसानों को पराली जलाने के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा रहा है। उमर्दा, सदर, हसेरन और छिबरामऊ ब्लाॅक क्षेत्र में धान की प्रमुखता से पैदावार हाेती है। कई किसान कंबाइन मशीन से धान की कटाई करवाते हैं। इसके बाद खेत में लगा देते हैं। पिछले वर्ष पयार जलाए जाने के 26 मामले सैटेलाइट के माध्यम से पकड़े गए थे। 57 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया था। किसान पयार न जला पाएं, इसके लिए इस बार कृषि विभाग ने पहले से ही तैयारी कर ली है। निगरानी के लिए टीम गठित कर दी है।
पयार जलाने की निगरानी प्रधान, सचिव, लेखपाल, चौकी प्रभारी और कृषि विभाग के कर्मचारी करेंगे। उप कृषि निदेशक संतोष कुमार ने बताया कि यदि कोई किसान दो एकड़ से कम क्षेत्र में पयार जलाता है, तो पांच हजार रुपये, दो से पांच एकड़ के बीच 15 हजार रुपये और पांच एकड़ से अधिक खेत में पयार जलाने पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। पयार जलाने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है, साथ ही मिट्टी की उर्वरा क्षमता भी घट जाती है। पयार जलाने के दुष्प्रभाव के बारे में स्लोगन गांव-गांव लिखवा दिए गए हैं। साथ ही जुर्माने की राशि भी लिखी गई है।