कलेक्ट्रेट परिसर में चतुर्थ श्रेणी राज्य
कर्मचारियों का दूसरे दिन भी धरना-प्रदर्शन जारी रहा। इस दौरान नाजिर व
बाबुओं के रवैये पर असंतोष जाहिर करते हुए जमकर नारेबाजी की। समस्याओं के
निदान के लिए गठित कमेटी पर धमकाने व समझौते के लिए दबाव बनाने का आरोप
लगाया।
मालूम हो कि उ.प्र. चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ
कलेक्ट्रेट द्वारा सात सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार से धरना-प्रदर्शन कर
रहे हैं। महामंत्री उमेशचंद्र गिहार का कहना है कि सभी कर्मचारियों को 31
मार्च से पहले कंप्लीट वर्दी अथवा नकद धनराशि दिए जाने की मांग उठाई गयी
थी।
इसके अलावा 26 साल पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को एसीपी का लाभ
जल्द दिलाए जाने सहित सात मांगों को पूरा न किए जाने के विरोध में 9 विगत
मार्च को काला फीता बांधकर विरोध जताया था। तब डीएम के आश्वासन पर विरोध
स्थगित कर दिया गया था।
विभिन्न मांगों को पूरा कराने के लिए एक
समिति का गठन कर 15 दिन में समस्या निस्तारण का आदेश जारी किया गया था।
लेकिन कमेटी ने मांगों को निस्तारित करने में कोई रूचि नहीं दिखाई। इसी के
चलते अनिश्चित कालीन धरना प्रदर्शन व कार्य बहिष्कार कर आंदोलन शुरू किया
गया है।
डीएम द्वारा गठित कमेटी के अध्यक्ष व डिप्टी कलेक्टर संदीप
कुमार का कहना है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बेवजह मामले को तूल दे रहे
हैं। उनकी मांगों को पूरा कराने के लिए प्रक्रिया चल रही है।
नजारत
से चालक पद पर प्रोन्नति के लिए इच्छुक कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी
लेकिन अभी तक मुहैया नहीं कराई गयी। वर्दी के लिए नकद धनराशि की मांग कर
रहे हैं, जबकि शासनादेश के मुताबिक कंप्लीट वर्दी देने का प्रावधान है।