छिबरामऊ। नर्सिंग होमों में इलाज के दौरान मरीजों की होने वाली मौत के बाद परिजन हंगामा करते हैं। पुलिस भी मामले को संज्ञान में लेकर शव का पोस्टमार्टम कराती है, लेकिन बाद में नर्सिंग होम संचालक और परिजन आपस में बैठक मौत का समझौता कर लेते हैं। इसके बाद स्वास्थ्य महकमे की कार्रवाई केवल कागजों तक सिमटकर रह जाती है।
थाना क्षेत्र के गांव अतिराजपुर निवासी विपिन दीक्षित ने 30 जनवरी को पत्नी को प्रसव के लिए खुबरियापुर रोड स्थित नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। डिलीवरी के बाद नवजात की हालत बिगड़ गई। इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई थी। इसी तरह कोतवाली क्षेत्र के बेहटा खास निवासी राजेश गुप्ता की बेटी रुचि गुप्ता को बुखार आने पर 18 मई को नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था।
यहां इंजेक्शन लगाते ही उसकी हालत बिगड़ गई। फर्रुखाबाद ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई थी। उसकी बाद कई दिनों तक आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन किया। कई लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हुए थे। इसी तरह के कई और मामले भी हुए जहां परिजनों के हंगामे के बाद समझौता हो गया। सीएमओ डॉ. स्वदेश गुप्ता ने बताया कि नर्सिंग होम में मरीज की मौत के बाद टीम पूरी जांच करती है। मरीज के तीमारदार आरोप लगाते हैं तो जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई भी की जाती है।