संत निरंकारी भवन में आयोजित सत्संग में महात्मा नरेश
चंद्र ने सद्गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि उसके बिना मानव का
कल्याण कभी नहीं हो सकता।
कहा कि जीवन में सच्चे सद्गुरु की प्राप्ति
बड़े भाग्य की बात है। बिना सद्गुरु के भव के पार जाना संभव नहीं है। कहा
कि सद्गुरु की संगत में सत्संग वह स्थल है जहां मानव राक्षसी प्रवृत्ति
छोड़कर देवता जैसी सुंदर प्रवृत्ति वाला बन जाता है। कलियुग में परमात्मा
को निराकार, अविनाशी, शाश्वत कहा गया है, जो इसके साथ नाता जोड़ लेता है।
वह उसकी हकीकत से अवगत हो जाता है। नेहा और निशा ने भजन सुना भावविभोर कर
दिया। रामप्रताप के संचालन में हुए कार्यक्रम में कमलेश कुमार, शशी
प्रभाकर, विनीता, पूजा, सृष्टि, मेघा, मालती, शशि वर्मा, अरविंद, दयाशंकर,
राजकुमार गुप्ता, रामरहीस, देवदत्त और जयपाल आदि मौजूद थे।