बेटे की बारात लेकर छिबरामऊ जा रहे दूल्हे के पिता की सड़क हादसे में मौत हो गई, जबकि कार सवार चार अन्य लोग घायल हो गए। दुर्घटना के संबंध में मृतक के भाई ने अज्ञात ट्रैक्टर चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कस्बे के मोहल्ला इंदिरानगर निवासी शरीफ खान पुत्र फकरूल के बेटे आरिफ की बारात शुक्रवार की देर रात छिबरामऊ के मोहल्ला बिरतिया निवासी मो.आलम के घर जा रही थी। रात करीब पौने नौ बजे जब बारात सरदापुर के पास पहुंची तभी सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी टवेरा गाड़ी में टक्कर मार दी। भिड़ंत इतनी जबरदस्त थी कि टक्कर लगते ही गाड़ी के परखचे उड़ गए और वह घूमकर दूसरी ओर खड़ी हो गई। तेज धमाके और चीखपुकार सुनकर आस-पड़ोस के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।
लोगों की भीड़ ने गाड़ी में फंसे दूल्हे के पिता शरीफ खान, गाड़ी चालक औरैया जनपद के थाना दिबियापुर अंतर्गत कैलाशबाद निवासी शिवेंद्र उर्फ सिब्बू, इटावा निवासी रिटायर्ड वनरक्षक आनंद स्वरूप, डिप्टी रेंजर यतेंद्रभान सिंह, नगला सरदारपुर निवासी गुड्डू यादव पुत्र रामभरोसे तथा इटावा के वेदपुरा निवासी दिवारीलाल पुत्र हरवंशलाल को किसी तरह गाड़ी से बाहर निकला। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल दूल्हे के पिता की रास्ते में मौत हो गई। दुर्घटना के संबंध में मृतक के भाई रईस खान ने ट्रैक्टर के अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
शहनाई की जगह मची चीखपुकार
छिबरामऊ। नगर के मोहल्ला बिरतिया निवासी मो.आलम ने अपनी पुत्री की शादी कस्बे सौरिख के मोहल्ला इंदिरानगर निवासी अपने बहनोई शरीफ खान के पुत्र आरिफ से तय की थी। शुक्रवार को घर में बारात के स्वागत की तैयारियां चल रही थी। देर रात जब लोग घर पर बारात के आने का इंतजार कर रहे थे। तभी दुर्घटना की सूचना मिलते ही खुशियों का माहौल मातम में बदल गया। परिजन घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। शहनाई बजने की जगह चीखपुकार सुनाई देने लगी।
नहीं हुई विवाह की रस्में
सौरिख। मोहल्ला इंदिरानगर में शरीफ के घर नई नवेली बहू के आने को लेकर जोरदार तैयारियां चल रही थी। किसी को क्या पता था कि उनकी खुशियों को इतनी जल्दी ग्रहण लग जाएगा। बहू आने से पहले ही दूल्हे के पिता का शव जैसे ही घर पहुंचा मानो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। बहू की डोली आने के बजाय दूल्हे के पिता की अर्थी घर से निकलते ही सभी की आंखें नम हो गई। हादसा होने के बाद विवाह की रस्मों को जहां का तहां रोक दिया गया।