नववर्ष की पहली किरण के साथ बरसात ने दस्तक दी। इससे ज्यादातर किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं। बारिश से खेतों में खड़ी आलू, मटर, सरसों सहित अन्य फसलों को 10 से 15 फीसदी तक नुकसान की आशंका है। आलू किसान पहले ही पाला के कहर से जूझ रहे थे। अब बारिश की आफत आ गई है। हालांकि यह बरसात गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद साबित होगी।
नए साल की शुरुआत में बारिश पिछले तीन वर्षों से हो रही है। बिन मौसम की इस बारिश से आलू की फसल को जबरदस्त नुकसान पहुंच रहा है। इसके अलावा पकने को खड़ी मटर, सरसों, अरहर की फसलें भी इस बारिश से प्रभावित होंगी।
गांव बंशरामऊ निवासी मोनू ठाकुर का कहना है कि बिन मौसम की इस बारिश ने किसानों को तबाही की कगार पर ला दिया है। आलू की फसल में बरसात के चलते प्रत्येक वर्ष 15 से 25 फीसदी तक नुकसान हो रहा है। मटर, सरसों, अरहर की फसलों का भी यही हाल है। पैदावार घटने से बाजार में आलू का भाव अधिक रहता है, जिसका फायदा व्यापारी ही उठाते हैं। किसान अगली फसल के चक्कर में अधिकतर आलू की बिक्री कर देते हैं। व्यापारी आलू को रोककर दूनी कीमत पर बिक्री करते हैं।
किसान राजीव कटियार ने कहा कि आलू किसान पहले ही दिसंबर माह से शुरू हुए पाले से भयभीत था। पाले से फसल को बचाने के लिए तमाम कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग कर रहा था। इसमें हजारों रुपये बर्बाद हो चुके हैं। अब शुरू हुई बारिश ने किसानों को तबाही पर लाकर खड़ा कर दिया है।
बरसात से काफी मात्रा में आलू सड़ जाता है। इसके अलावा चेचक सहित कई रोगों से ग्रसित हो जाता है। खुदाई के दौरान निकलने वाले आलू की क्वालिटी अच्छी न होने पर बाजार में माटी के मोल बिकता है। किसानों ने कहा यह पानी गेहूं की फसल के लिए तो फायदेमंद साबित होगा।
जो किसान कच्ची आलू की फसल खोदकर गेहूं की बुआई कर चुके हैं, उनके लिए यह बरसात वरदान साबित होगी। उनको एक सिंचाई की बचत होगी। इसके अलावा तापमान गिरने से फसल की पैदावार बढ़ेगी।