गर्मी से बचने का प्रयास करती युवती।
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गर्मी व तेज धूप के कहर से लोग परेशान हैं। सुबह से गर्मी के प्रचंड रूप ने लोगों को घरों के अंदर दुबकने को मजबूर कर दिया। सड़कों पर निकले लोग भी गर्मी से अपने को बचाव करते दिखे। वहीं आफिसों में भी गर्मी का असर साफ नजर आया। भीषण गर्मी में स्कू्ली बच्चों को तेज धूप व तपिश से जूझना पड़ रहा है। गुरुवार को 42 डिग्री तक पहुंचे तापमान ने सभी को बेहाल कर दिया है। शुक्रवार को तेज उमस का अनुमान है।
न्यूनतम तापमान में हो रहा इजाफा तेज धूप से साथ गर्मी को बढ़ा रहा है। गर्मी केे कारण मजूदरों को जहां काम मिलने में दिक्कत हो रही है। वहीं ठेलिया दुकानदारों की बिक्री कम हो गई है। टेंपो में सवारियां भी दोपहर में नहीं दिख रही हैं। कुछ टेंपो चालकों ने दोपहर में अपनी गाड़ियां ही खड़ी कर दी हैं।
बाइक सवार गमछा लपेट कर चल रहे हैं। गर्मी से स्कूली बच्चे बेहाल हैं। स्कूल की छुट्टी के समय गर्मी व धूप तेज होने से बच्चों के स्वास्थ्य के लिए माता पिता भी परेशान हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विशेषज्ञ डा. विजय कुमार ने बताया कि 2009 में सर्वाधिक गर्मी पड़ी थी। उस दौरान अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस था। वहीं सात साल बाद तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रहा है। यह बेचैन करने वाली गर्मी है। किसान भाई खेतों में हल्का पानी लगा दें। वहीं, आम लोग जरूरत के समय ही घर से बाहर निकले।
मई, जून का अहसास करा रही तपन
तालग्राम। गर्मी के कारण मुख्य बाजार व मार्गों पर सन्नाटा दिखाई दिया। एक बजे छुट्टी के बाद स्कूली बच्चे गर्मी से परेशान व बेहाल नजर आए। अप्रैल में तपन मई जून का अहसास करा रही है। लोग पेय पदार्थों की दुकानों से गले तर करने में जुटे हुए हैं। वैसापुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डा. दीपांकर कटियार बताते हैं कि खाली पेट घर से बाहर न निकले। कुछ भोजन अवश्य कर लें। पेट में पानी की कमी न होने दें। शरीर को ढंककर निकले। सफर के समय प्यास लगने पर कुछ देर आराम के बाद ही पानी पीएं। गर्मी के मौसम में ककड़ी, खीरा व नीबू तरल पदार्थ का सेवन करें। कटे-फटे फलों से दूर रहें।