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Kannauj News: जेल की सलाखों में सींच रहे परिवार की बगिया

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कन्नौज। जिला कारागार में बड़े अपराधी बंद हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो परिस्थितिवश सलाखों में कैद हैं। ऐसे बंदी बाहर मेहनत-मजदूरी कर परिवार की गाड़ी चलाते थे।
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वे अब कारागार में भी पसीना बहा रहे हैं और पारिश्रमिक के रूप में मिलने वाली धनराशि से घरवालों की मदद कर रहे हैं। खबर में दिए गए दो उदाहरण महज समझाने भर हैं। जेल की सलाखों में पसीना बहाकर परिवार की बगिया सींच रहे हैं।


जिला कारागार में कृषि फार्म के साथ ही भंडारा, साफसफाई से लेकर अन्य सभी काम बंदियों से ही कराए जाते हैं। काम के बदले बंदियों को पारिश्रमिक भी मिलता है। अकुशल को 50, अर्द्ध कुशल को 60 और कार्य में कुशल को 81 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलते हैं। जिला कारागार में 602 बंदी हैं, जिसमें 42 महिलाएं हैं। सभी बंदी अकुशल हैं।
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जेल के कार्य बंदी करते हैं और उनका मेहनताना कारागार में ही जमा होता रहता है। बंदी अगर छूटने के पहले बीच में रुपयों को घर भेजना चाहता है तो मुलाकात के दौरान घरवालों को सूचना दे देता है। अपने आश्रित या किसी नजदीकी रिश्तेदार को भुगतान के लिए जेल में प्रार्थना पत्र देता है। बंदी पारिश्रमिक के रूप में धनराशि अर्जित कर घर भेज रहे हैं। बहुत से बंदी पारिश्रमिक को गृहस्थी में उपयोग कर रहे हैं। कई बंदी तो ऐसे हैं, जो रुपयों को जमा कराते रहे और जमानत पर छूटने के बाद कारागार से चेक ले गए व रोजगार अन्य कार्य में लगाया।

जेल अधीक्षक ने बताया कि 24 मार्च 2023 से नौ फरवरी तक 13 बंदियों को पारिश्रमिक की चेक दी गई। इसमें महिला बंदी सोनी भी शामिल हैं। सोनी ने 11,850 की धनराशि की चेक पति को दिलाई, जिससे बच्चों की पढ़ाई व अन्य कार्यों में खर्च किया गया।
कारागार में बंदियों को सुधरने का पूरा मौका दिया जाता है। इसमें अधिकांश बंदी सुधर भी जाते हैं। बंदियों का कल्याण भी प्राथमिकता है। जेल में काम करने वाले बंदियों को पारिश्रमिक दिया जाता है। यह बहुत अच्छी बात है कि काफी संख्या में बंदियों ने बड़ी धनराशि जमा की और वह उनके व परिवार की मदद में सहायक हुई। -प्रमोद कुमार त्रिपाठी, जेल अधीक्षक
उदाहरण एक : जिला कारागार के बंदी विष्णु कुमार ने परिश्रम किया और 22 हजार से अधिक धनराशि एकत्र की। 19 अक्तूबर रिहा होने पर कारागार से चेक ली और गृहस्थी में धनराशि का प्रयोग किया।

उदाहरण दो : कारागार में बंदी कुलदीप ने परिश्रम कर पसीना बहाया और 14 हजार से अधिक धनराशि एकत्र की। कुलदीप के परिवार को रुपयों की आवश्यकता थी और मुलाकात करने आई मां लीलावती को चेक दिलाई।
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