फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रदर्शनी में 60 हजार की शाल

Thu, 29 Dec 2016 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
विज्ञापन
प्रदर्शनी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
सेठ वासुदेव इंटर कालेज खेल मैदान में हस्तशिल्प प्रदर्शनी में माचिस की तीलियाें से बुनी हुई कश्मीरी काजी जामा शाल, सहारनपुर के मशूहर लकड़ी कारीगरों के हाथ से बनी दीवार घड़ी, धर्म ग्रंथों के लिए आधुनिक स्टैंड पर पीतल की नक्काशी समेत आंध्र प्रदेश के बुनकरों की कला का प्रदर्शन हो रहा है।
विज्ञापन


प्रदर्शनी में कश्मीर से आए एजाज बताते हैं कि मशहूर शाल काजी जामा कारीगर सप्ताह भर जुटकर माचिस की तीलियों से बुनकर तैयार करते हैं। इस पर नक्काशी करने में एक सप्ताह से ज्यादा का समय लगता है। सहारनपुर के अरशद ने बताया कि धर्मग्रंथाें को रखने के लिए स्टैंड को आधुनिक रूप दिया गया है। हाथाें से तराशी गई लकड़ी की घड़ी 1200 की है जिसे ढाल और तलवार का रूप दिया गया है।

आंध्र प्रदेश से आए श्रीनिवास राव बताते हैं कि कपड़ों पर कलमकारी छपाई के बाद देशी रंगाें के साथ तैयार कु र्ते केेे कपड़े आकर्षक हैं। रामजी बताते हैं कि शुद्ध पीतल की मां दुर्गा की मूर्ति एक फुट ऊं ची और 10 किलो वजनी है। आजमगढ़ के जमाल अहमद और बनारस के जमशेद आलम के पास हाथों से बुनी साड़ियां है जिनकी कीमत 300 से लेकर 2000 तक है। वहीं जयपुरी जूती की तमाम वैराइटी 200 रुपये और कोल्हापुरी चप्पल 300 रुपये में खरीद सकते हैं। प्रतापगढ़ के हरीश सिंह आंवला से बनी बर्फी और लड्डू 120 प्रति किलो के हिसाब उपलब्ध है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें