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Kannauj News: औषधि निदेशालय ने सीएमओ को सौंपी जांच, 10 दवाइयों के वितरण पर रोक

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कन्नौज। मानकविहीन दवा मिलने पर औषधि निदेशालय ने शनिवार को सीएमओ को जांच सौंप दी है और एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल उस दवा के स्टाॅक को सील कर दिया गया है और अस्पतालों में मरीजों को वितरण पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा औषधि विभाग ने वेयर हाउस जाकर 10 अन्य दवा का सैंपल लेकर जांच के लिए वाराणसी स्थित प्रयोगशाला भेज दिया है। इसमें टेबलेट, कैप्सूल, इंजेक्शन व स्किन क्रीम भी शामिल हैं।
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गुरसहायगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मानकविहीन सेरेसियोपेप्टाडाइजेज दवा मिलने के बाद औषधि निरीक्षक ने वेयर हाउस जाकर 10 अन्य दवा के सैंपल लेकर जांच के लिए बनारस स्थित प्रयोगशाला भेज दिए हैं। अब उनकी रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, औषधि निदेशालय ने इस मामले की जांच सीएमओ डॉ. स्वदेश गुप्ता को सौंपकर एक हफ्ते के अंदर रिपोर्ट मांगी है। उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने किन कंपनियों से अनुबंध के तहत दवा ली और उन्हें कहां-कहां भेजा गया, इसकी भी जांच की जा रही है।
वहीं, जिले में पिछले एक साल के दौरान किन कंपनियों की दवाइयां वेयर हाउस में आईं और किन अस्पतालों में कितनी टेबलेट व इंजेक्शन भेजे गए, इसकी रिपोर्ट सीएमओ को देनी होगी। इसके बाद औषधि निदेशालय की टीम इन कंपनियों की फैक्टरी में जाकर साल्ट व घुलनशीलता की जांच करेगी। यदि वहां भी मानकविहीन दवा मिली तो शासन को रिपोर्ट भेजकर कंपनियों पर भी कार्रवाई होगी। औषधि निरीक्षक डॉ. परमेश द्विवेदी का कहना है कि गुणवत्ता में संदेह होने पर वेयर हाउस से 10 दवा के सैंपल लेकर वाराणसी स्थित प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट आने की संभावना है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ डॉ. स्वदेश गुप्ता का कहना है कि मानकविहीन दवा मिलने के बाद औषधि निदेशालय ने मुझे जांच सौंपते हुए रिपोर्ट मांगी है। तीन नवंबर को वह वेयर हाउस जाकर कारपोरेशन से आने वाली दवा की रिपोर्ट तैयार करेंगे। जांच रिपोर्ट आने तक वितरण पर रोक लगा दी गई है।
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मरीजों की सेहत से खिलवाड़ कर रहीं कंपनियां

जिलों में सबसे अधिक मरीज सरकारी अस्पतालों में जाते हैं। अस्पतालों में एंटीबायोटिक, एंटी एलर्जिक, एनालजेसिक, एंटी स्पासमोडिक समेत सभी दवाइयों की आपूर्ति मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के माध्यम से की जाती है। इसके अलावा दर्द निवारक इंजेक्शन, एंटीसेप्टिक व स्किन क्रीमों की भी आपूर्ति होती है। ये दवाइयां मरीजों को मुफ्त में वितरित की जातीं हैं। ऐसे में कारपोरेशन का जिन कंपनियों से अनुबंध होता है तो वह बाजार के लिए स्टैंडर्ड व जेनेरिक दवा अच्छी क्वालिटी की बनाती हैं, जबकि सरकारी सप्लाई में मानकों का ध्यान नहीं रखा जाता है।

गोदामों में सड़ रहीं करोड़ाें की दवा

कोरोना संकट काल में जब लोग एक-एक गोली के लिए तरस रहे थे। अब वहीं दवा सड़कों के किनारे फेंकीं जा रही हैं। पिछले माह शहर के पाल चौराहे पर लाखाें रुपये की दवा फेंक दी गईं। पुलिस ने जब ट्रांसपोर्टर को पकड़ा तो उसने बताया कि ये दवा कोरोना काल में उनके पास गाजियाबाद से भेजी गईं थीं। कई बार कहने के बाद भी स्वास्थ्य महकमे ने इन दवाइयों को नहीं उठवाया तो वह गोदाम में ही खराब हो गईं। दीपावली पर मकान मालिक ने गोदाम खाली करवाई तो मजबूरी में इन दवा को फेंकना पड़ा।
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इन दवाइयों के भेजे गए सैंपल

* डाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन
* लिवोसेट्रिजिन टेबलेट
* डॉक्सीसाइक्लिन कैप्सूल
* फ्रामायसेटिन स्किन क्रीम
* पॉविडोन आयोडीन ऑइंटमेंट
* कैल्शियम एंड विटामिन डी-3 टेबलेट
* सेफेक्जिम टेबलेट
* फ्लूकोनॉजॉल टैबलेट
* हाइड्रोकॉर्टिजोन सोडियम सक्सीनेट इंजेक्शन
* बेंजॉयल बेंजोएट एप्लीकेशन आईपी
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