खनन माफिया द्वारा बालू खनन करने से नहर का पानी आगे
नहीं बढ़ पा रहा था। यहां तक उसकी धारा ही मुड़ गई थी। इस समस्या को अमर
उजाला ने प्रकाशित किया था। खबर का असर हुआ। नहर विभाग ने पानी छोड़ दिया,
जिससे जहां खेतों की किसान सिंचाई कर पाएंगे, वहीं माफिया बालू खनन नहीं कर
पाएंगे।
निचली गंगा नहर में पानी कम होने का फायदा उठाते हुए माफिया
ने अवैध रूप से जमकर बालू का खनन करना शुरू कर दिया था। व्यापक रूप से किए
गए खनन से नहर में जगह-जगह गड्ढे हो गए थे। वहीं पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा
था, जिससे क्षेत्र के दर्जनों गांवों के सैकड़ों बीघा खेतों में खड़ी फसल
की सिंचाई नहीं हो पा रही थी।
परेशान किसानों ने प्रशासन से इस समस्या से
निजात दिलाने की कई बार गुहार लगाई, पर माफिया के आगे सभी बेबस नजर आए। 20
फरवरी के अंक में अमर उजाला ने माफिया ने नहर की धारा मोड़ी शीर्षक से
सचित्र खबर प्रकाशित करते हुए किसानों की समस्या उठाई। खबर का असर यह हुआ
कि दूसरे दिन नहर विभाग ने भारी पैमाने पर पानी छोड़ दिया।
पानी छोड़ने से
जहां एक ओर किसानों के चेहरे खिल गए, वहीं खनन माफिया के चेहरों पर मायूसी
छा गई। क्षेत्र के किसानों का कहना था कि पानी छोड़े जाने से अब उनकी फसलों
की आसानी से सिंचाई हो सकेगी। वहीं दूसरी तरफ माफिया अब बालू का खनन नहीं
कर पाएंगे।