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अग्नि पीड़ितों को 48 घंटे में दी चेक

Sun, 26 Feb 2017 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
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मदद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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थाना तालग्राम के बेहटा में आग से तबाह होने वाले परिवारों को प्रशासन की ओर से 48 घंटे बाद आर्थिक सहायता की चेक सौंपी गई। कुछ लोग आर्थिक सहायता से वंचित रह गए। कुछ पीड़ितों ने आर्थिक सहायता को कम बताया है।
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दो दिन पूर्व बेहटा गांव में घूरे से निकली चिंगारी से 10 घर जलकर राख हो गए थे। इस घटना में लाखों रुपये की क्षति पीड़ित परिवारों को उठानी पड़ी थी। हादसे के बाद प्रशासन ने कोटेदार से पीड़ितों को केरोसिन देने का आदेश दिया था। इसके बाद भी उनको नहीं मिला।

रविवार की दोपहर बाद नायब तहसीलदार अवनीश कुमार व लेखपाल भारत सिंह ने ग्राम प्रधान महेंद्र प्रताप सिंह की मौजूदगी में आग से बर्बाद हुए श्रीकृष्ण, प्रेम नारायण, सरमन पुत्रगण झब्बूलाल, सोनपाल, कृपाल पुत्रगण भारत सिंह, सुरेंद्र पुत्र सरमन को सात हजार नौ सौ रुपये की चेक सौंपी है। यह पीड़ित परिवारों के लिए नाकाफी साबित हो रही है।  पीड़ित सरमन व कृपाल समेत ग्रामीण बताते हैं कि आग से उनके घर में रखा लाखों रुपये का सामान जल गया था लेकिन आर्थिक सहायता बहुत कम है। इस रकम से फूस का बंगला भी नहीं बनाया जा सकता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि पिछले साल 13 अप्रैल 2016 को तबाह हुए 18 परिवारों को तत्कालीन एसडीएम महेश प्रसाद दीक्षित ने आवास बनवाने का आश्वासन दिया था लेकिन आज तक आवास नहीं मिले हैं। सभी ने आवास दिलाने की गुहार लगाई है।
 
कुछ पीड़ितों नहीं मिली मदद
आग की घटना के बाद पीड़ित परिवारों को मुआवजा न मिलने से उनमें मायूसी है। राम विलास बताते हैं कि उनके साथ ही जयपाल, श्रीपाल और दिलीप का आग से नुकसान हुआ था लेकिन सूची बनाते समय भाइयों व पिता के साथ उन्हें जोड़ दिया गया है जबकि वह अलग रह रहे हैं। दोबारा सर्वे कर उन्हें आर्थिक मदद की सूची में शामिल किया जाए।
 
तीसरे दिन भी धधकती रही आग..
तीसरे दिन भी ग सुलगती रही। सुबह राम विलास के घर में रखे भूसे से अचानक आग धधक उठी। धुआं देख आसपास के लोग दौड़ पड़े और पानी डालकर आग बुझाई। इसके बाद लोगों ने भूसे को घर से बाहर निकाल कर बाहर कर दिया है।

पालीथिन के नीचे कट रही रातें
अमोलर। आग से तबाह परिवार के लोग टाट पट्टियों व पालीथिन के नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं। कुछ लोगों ने गांव से मदद के लिए चारपाई भी मांग ली है लेकिन अभी तक स्थानीय प्रशासन ने पीड़ितों को सिर छिपाने के लिए कोई जगह नहीं दी है। पीड़ित परिवार का कहना है कि तीन दिन बीतने के बाद केवल क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य पूनम भदौरिया व उनके पति योगेंद्र भदौरिया के अलावा कोई भी राजनैतिक दल का नेता उन्हें देखने तक नहीं आया। इतने बड़े हादसे में किसी भी समाजसेवी ने राहत उपलब्ध कराना उचित नहीं समझा। राशन विक्रेता की ओर से मिट्टी का तेल न मिलने से लोग अंधेरे में रहने को मजबूर है।
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