केंद्र व राज्य सरकार से संचालित आवास योजनाओं में ठगों का गिरोह सक्रिय है। इससे पात्रों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना में पिछले वित्तीय वर्ष के 31 लाभार्थियों के जांच में अपात्र मिलने पर धनराशि को वापस करना पड़ा था। अब तक इस प्रकरण में किसी की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है।
ग्राम पंचायतों में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बीपीएल लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित किया जाता है। योजना में बीपीएल सूची के आधार पर आवास की सूची चयनित की जाती है।
खंड विकास अधिकारी ग्राम पंचायत अधिकारियों से सूची का भौतिक सत्यापन कराने के बाद डीआरडीए को भेजते हैं। प्रत्येक वर्ष आवास योजना में सैकड़ों नाम फर्जी तरीके से शामिल हो जाते हैं। ग्रामीणों की ओर से की जाने वाली शिकायत में ग्राम पंचायत अधिकारी व ग्राम प्रधान को दोषी ठहराया जाता है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है। पिछले वित्तीय वर्ष में 31 आवासों को फर्जी ढंग से आवंटित कर दिया गया था।
परियोजना निदेशक विजय प्रकाश वर्मा ने बताया कि विकास खंड उमर्दा में 17, छिबरामऊ में नौ, सौरिख में दो , गुगरापुर में दो अपात्र पाए गए थे। इन आवासों की धनराशि को शासन को वापस कर दिया गया। इन्होंने बताया कि संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण मिलने के बाद इन सभी पर कार्रवाई होगी।