पट्टी मटेना गांव के जंगली कुत्तों को पकड़ने में प्रशासन लाचार है तो ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। 31 मई को कुत्तों के हमले के बाद हुई बालक की मौत के बाद ग्रामीण टीमों में सुरक्षा में लगे हुए हैं। ग्रामीणों की माने तो कुत्तों के हमले के बाद वन विभाग ने अभी तक किसी भी तरह की मदद मुहैया नहीं कराई है। जिम्मेदार विभाग आज-कल की बात टरका रहा है। ग्रामीण नदी किनारे व खेतों में कुत्तों का तलाश रहे हैं।
ग्रामीण उमाशंकर, मनीष कुमार, हरीराम, रामादीन, परमेश्वर, रामआसरे, रामगिरि, बबलू ने कहा कि बीते दिनों अपने गांव के एक बच्चे को खोया है। दर्द उनके गांव का है , लेकिन प्रशासन की संवेदनाएं शून्य हो गई हैं। अब हम सभी ग्रामीणों ने वन विभाग से उम्मीद छोड़ दी है।
ग्रामीणों ने कहा कि डीएम के आदेश के बाद भी वन विभाग के अधिकारी ने कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई मशक्कत नहीं की है। तीन दिन पहले वन विभाग की टीम आई थी, तो ग्रामीणों से ही कुत्तों के बारे में पूछताछ कर अपने दस्तावेजों को पूरा कर लौट गई। ग्रामीणों ने अमर उजाला संवाददाता को बताया कि जब से जंगली कुत्तों ने हमला किया है, तब से दिनचर्या बिगड़ गई है।
ग्रामीण शाम होते ही बारी-बारी से टोली बनाकर बच्चों व मवेशियों की सुरक्षा में लगे रहते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वन विभाग की टीम नदी किनारे क्षेत्र में डेरा डालकर जंगली कुत्तों को पकड़े तो ग्रामीणों को सुकून मिले। ग्रामीणों ने बताया कि तीन दिनों से वन विभाग की टीम नहीं आई है। पहले भी जब वन विभाग की टीम आई थी, तो उसने ग्रामीणों की कोई मदद नहीं की थी।
फसल का हो रहा नुकसान
ग्रामीणों ने कहा कि कुत्तों के डर से किसान के परिवारों ने नदी किनारे खेतों में जाना छोड़ दिया है। इस समय मक्के की फसल तैयार हो गई है। ऐसे अगर जल्द कुत्तों के डर से ग्रामीणों को निजात नही दिलाई गई तो किसान भुखमरी के कगार पर आ जाएगा।
कोट
ऐसा नहीं है, वन विभाग की टीम ने जाकर वहां के हालातों को जाना है। हमने कुत्ताें को पकड़ने की कोशिश भी की है, लेकिन हमें कामयाबी नहीं मिल पाई। अब अगले दो दिनों में वन विभाग की टीम को जाल के साथ भेजा जाएगा, और कुत्तों को पकड़ा जाएगा। - आरके सिंह, डीएफओ