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Kannauj News: कागजों में खाद का पर्याप्त स्टॉक, समितियों में मारामारी

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कन्नौज। कागजों पर दर्ज आंकड़ाें में उर्वरक का पर्याप्त स्टॉक है पर समितियों में खाद लेने के लिए किसानों में मारामारी है। सुबह से ही किसान समितियों के चक्कर लगाने लगते हैं। कई समितियों पर स्टॉक खत्म होने से किसानाें को लाइन में लगने के बाद मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
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जिले में 58 सहकारी समितियां हैं। खरीफ की फसल में किसानों के लिए इस समय यूरिया की आवश्यकता है। डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री प्रतिदिन उर्वरक की समीक्षा कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि समितियों पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है पर किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। किसान लंबी कतारों में लगकर भी निराश लौट रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी संतलाल गुप्ता ने बताया कि जिले में 2,07,824 बोरी यूरिया, 1,15,359 बोरी डीएपी, 92,378 बोरी एनपीके व एसएसपी 87,206 बोरी खाद उपलब्ध है। इसमें 65 फीसदी सहकारी समितियों व 35 फीसदी उर्वरक निजी दुकानों पर दी जाती है। कहा कि सहकारी समितियों पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध है। खाद की कुछ निजी दुकानों पर ऐसी समस्या आ रही है।

267 रुपये की खाद दुकानों में मिल रही 500 रुपये में
तालग्राम। साधन सहकारी समितियों में खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। वहीं दुकानदार फायदा उठा रहे हैं। तालग्राम बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति पर दो बोरी यूरिया प्रति किसान को दी जा रही। इससे 267 रुपये बोरी मिलने वाली यूरिया दुकानदार 400 से 500 रुपये में बेच रहे हैं। इसके साथ किसानों को जिंक या सल्फर लेने के लिए भी विवश कर रहे हैं।
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तालग्राम संचालित बहुउद्देशीय ग्रामीण सहकारी समिति पर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक खाद भेजे जाने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद किसानों को पर्याप्त खाद मुहैया नहीं हो रही है। किसानों के मांग के अनुसार समिति पर खाद उपलब्ध नहीं है। समिति पर तालग्राम सहकारी समिति को 2800 बोरी यूरिया का आवंटित है। इसमें 1400 बोरी आ गई है बुधवार को सुबह 600 बोरी यूरिया स्टाक में है। खातेदार किसान को दो बोरी यूरिया खाद दी जा रही। किसानों ने बताया कि समिति पर जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है। महंगे दाम पर निजी दुकानदार से ख़रीदनी पड़ रही है। जिंक व सल्फर का पैकेट नहीं लेने पर यूरिया नहीं देने की बात कही जा रही है। समिति सचिव सत्यवीर सिंह ने बताया कि यूरिया खाद प्रर्याप्त मात्र में उपलब्ध है। लेकिन किसानों को दो बोरी के हिसाब से दी जा रही है। दो दिन में सात सौ बोरी और खाद आ जाएगी।

एक हेक्टेयर पर चार बोरी खाद देने का आदेश
जलालाबाद। साधन सहकारी समिति पर 230 बोरी यूरिया, 800 बोरी पोटास, 700 बोरी डीएपी, 700 बोरी एपीके उर्वरक का ऑर्डर लगा है। सचिव वीरेश यादव ने बताया कि दो तीन दिन में खाद आ जाएगी। बताया कि आलू क्षेत्र होने के कारण अभी किसान ज्यादा नहीं आ रहे हैं। 15 से 20 दिन बाद किसान खाद लेने आएंगे। बिना खतौनी, आधार कार्ड के किसी को खाद नहीं दी जा रही है। एक हेक्टेयर पर चार बोरी खाद देने का आदेश है।

यूरिया लेने के लिए पहुंच रहे किसान
जसोदा। साधन सहकारी समिति में 608 बोरी यूरिया, 16 बोरी डीएपी, 687 बोरी पोटास, 234 बोरी नेचुरल पोटास स्टॉक में है। डीएपी और एनपीके का आर्डर लगा है। कुछ दिनों में आने की संभावना है। सचिव प्रमोद सिंह ने बताया कि बिना खतौनी व आधार कार्ड के किसान को खाद नहीं दी जा रही है। एक हेक्टेयर पर पांच बोरी यूरिया और पांच बोरी एनपीके खाद देने का आदेश है। प्रतिदिन 20 से 25 किसान खाद लेने के लिए आ रहे हैं।

समिति पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध खाद
सिकंदरपुर। सहकारी समिति के सचिव वीरेश यादव ने जानकारी दी कि उनके यहां 1500 बोरी यूरिया, 500 बोरी डीएपी व 100 बोरी एनपीके तथा नैनो यूरिया पर्याप्त उपलब्ध है। क्षेत्र के किसानों को खाद के लिए किल्लत का सामना नहीं करना पड़ रहा है। मगर शासन द्वारा तय मानक (खतौनी, आधार कार्ड ) लेकर आने वालों को ही खाद दी जाएगी। मगर सहकारी समिति क्षेत्र में लगे दो मौजा करमुल्लापुर और असेह के कागजात जले हुए हैं। उन किसानों के पास इंतखाब ना होने की वजह से खाद नहीं उपलब्ध हो पा रही हैं। सहकारी समिति के अध्यक्ष ने बताया कि इन किसानों की समस्याओं को कई बार उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया। मगर समस्या का अभी तक समाधान नहीं हो पाया है।




बोले किसान
जलालाबाद निवासी किसान कमलकांत कटियार ने बताया कि किसानों को उर्वरक की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यूरिया और डीएपी जैसी खाद नहीं हैं। कई जगहों पर, किसान खाद के लिए घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं, फिर भी उन्हें अपनी जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है।
किसान कन्हैया तिवारी बताते हैं कि किसान आलू की फसल बोने के लिए खेतों को तैयार करने में जुट गया है। कई समितियों पर यूरिया और डीएपी की कमी होने से वह निजी दुकानों का सहारा ले रहे हैं। इस कमी से फसलों पर बुरा असर पड़ रहा है, जिससे किसानों में आक्रोश और निराशा है।
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