इस साल कम बारिश होने का खामियाजा परदेसी परिदों को
भी भुगतना पड़ेगा। सर्दी का मौसम शुरू होते ही सात समुंदर पार करके आने
वाले लाखों पक्षियों के आने का समय आने वाला है। इसके बावजूद लाख बहोसी
पक्षी विहार की झील में पानी की कमी दूर करने की जरूरत नहीं समझी जा रही
है।
बहोसी के मंगल सिंह, टीचर राजीव शुक्ला, कटैया निवासी सुजीत पाल,
जिनौठी राहुल त्रिपाठी का कहना है कि बीते वर्ष पानी नहीं था। तब
जिलाधिकारी के आदेश पर नहर से पानी छोड़कर पक्षी विहार की झील को भराया गया
था। अबकी कई बार विभागीय लोगों से मांग की जा चुकी हैा, पर कोई सुनवाई
नहीं हो रही है।
उधर, ग्रामीणों का कहना है कि झील में पर्याप्त पानी न
होने से मछली मारने वालों की चांदी है। तमाम लोग अवैध तरीके से झील में
मौजूद मछलियों को पकड़ रहे हैं। उधर, वन दरोगा रामबाबू सिंह तोमर का कहना
है कि रजबहा को कटवाकर भराने की की कोशिश की थी तो किसानों ने आपत्ति जता
दी।
खेतों की सिंचाई के लिए पानी कम मिलने की बात कहकर किसानों ने मना कर
दिया। उन्होंने बताया कि नहर का कुलाबा का पाइप नीचे है, जबकि नाली ऊपर
है, इससे कुलाबे से पानी नहीं निकल पा रहा है। समस्या से अफसरों को अवगत
करा दिया गया है। अभी ऊपर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
उधर, एडीएम
संतोष वैश्य का कहना है कि इस बाबत वन क्षेत्राधिकारी को पत्र भेजा जाएगा।
पक्षी विहार की झील में जल्द ही पर्याप्त पानी का इंतजाम सुनिश्चित
कराएंगे। ज्ञात हो कि लाख झील अंडाकार व बहोसी झील घुमावदार है। करीब 80
वर्ग किमी क्षेत्रफल में यह पक्षी विहार फैला है। दोनों झीलों के बीच की
दूरी लगभग छह किमी है। बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी द्वारा पक्षी विहार
को महत्वपूर्ण बर्ड एरिया घोषित किया है।