कन्नौज। केंद्रीय श्रम संगठनों समेत तमाम इकाइयों के तत्वावधान में आम हड़ताल की गई। इसका सबसे अधिक असर बैंकों पर दिखा। भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर अन्य तालाबंदी होने से करीब 70 करोड़ रुपये का लेन-देन प्रभावित हुआ। वहीं, कार्यालयों में कर्मचारियों के न होने से सन्नाटा रहा। दूरदराज शिकायत लेने आने वाले फरियादियों को मायूस होकर घर लौटना पड़ा। ट्रेड यूनियन को-आर्डीनेशन सेंटर के पदाधिकारियों ने 16 सूत्री मांगों को लेकर डीएम को ज्ञापन सौंपा।
बुधवार को केंद्रीय श्रम संगठनों, औद्योगिक फेडरेशनों व कर्मचारी संगठनों के आह्वान पर 16 सूत्री मांगों को लेकर एक दिवसीय आम हड़ताल की गई। इसमें जिले के सभी केंद्रीय कर्मचारी, राज्य कर्मचारी, शिक्षक, संविदा, आशाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहिकाएं, रोजगार सेवक, चौकीदार एव आउटसोर्सिंग कर्मचारी हड़ताल पर रहे। बारिश की वजह से वह एक मंच पर विरोध प्रदर्शन नहीं कर सके। कार्यालयों में सन्नाटा रहा, अधिकतर कर्मचारी गायब रहे। हड़ताल का सबसे अधिक बैंकों पर प्रभाव दिखाई दिया। इसमें भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक, आईसीआईसीआई बैंक समेत निजी बैंकें हड़ताल में सम्मलित रहीं। बैंकों की हड़ताल की जानकारी न होने से दूर-दराज क्षेत्रों से आए लोगों को मायूसी हाथ ली। इससे उन्हें खाली हाथ घर लौटना पड़ा। जिला अग्रणी बैंक के प्रबंधक मनोज सिन्हा ने बताया करीब 70 करोड़ का लेन-देन प्रभावित हुआ है। इसमें नकदी समेत चेक का क्लिरियेंस नहीं हो सका। वहीं, स्टेट खुलने से कुछ राहत रही। वहीं, ट्रेड यूनियन को-आर्डीनेशन सेंटर के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह की अगुवाई में पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित 16 सूत्री मांगों को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
सभी का न्यूनतम वेतन 21 हजार से कम न हो। ठेका प्रथा बंद कर संविदा व आउट सोर्सिंग से रखे गए कर्मचारियों को नियमित किया जाए। बोनस और प्राविडेंट फंड में अदायगी पर से सभी बाध्यता सीमाएं समाप्त की जाए। सभी के लिए पेंशन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों की पुरानी पेंशन नीति को बहाल किया जाए। रोजगार सृजन के लिए ठोस कदम उठाए जाए। महंगाई पर रोक लगाने के लिए अहम निर्णय लिया जाए। श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए। संगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सर्वव्यापी सामाजिक सुरक्षा कानून बनाया जाए। ट्रेड यूनियनों का पंजीकरण 45 दिन की सीमा के अंदर अनिवार्य किया जाए। केंद्र सरकार रेल, रक्षा, बीमा में विदेश्ी पूंजी निवेश पर रोक लगे।