कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में महिला
सामाख्या द्वारा महिला सशक्तीकरण पखवाड़ा के अंतर्गत सोमवार को बेटी
बचाओ-बेटी पढ़ाओ जागरूकता अभियान के तहत गीत और नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर
जागरूक किया गया।
इसके साथ ही विद्यालय में गीत-संगीत व निबंध लेखन
प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। लड़का जरूरी-लड़की भी जरूरी है, दोनों
जरूरी फिर क्या मजबूरी है, बंद खिड़कियों के पीछे से बेटी ने पुकारा है,
आजादी हमको भी प्यारी, आजादी ही नारा है, बिटिया ने जनम लियो, हमारो घर
फूल बरसे गीत के माध्यम से महिलाओं की टीम ने छात्राओं को बेटी बचाओ और
बेटी पढ़ाओ के लिए जागरूक किया।
लखनऊ से आई नाट्य टीम के कलाकारों ने ढोलक,
मंजीरों की थाप पर नुक्कड़ नाटक पेश कर बेटियों को पढ़ाने-लिखाने और
उन्हें सुरक्षित रखने पर जोर दिया। महिला सामाख्या औरैया की कृष्णा,
शर्मीला, ब्रह्मा, रेखा, बाबूश्री आदि ने गीतों के माध्यम से बेटी बचाने के
लिए सभी को जागरूक किया।
जिला समन्वयक रंजना मिश्रा ने कहा कि बेटी
बचाओ-बेटी पढ़ाओ जागरूकता अभियान में कम हो रहे बालिका लिंगानुपात पर विशेष
ध्यान देने, भ्रूण की जांच न कराने, बेटी-बेटों में समानता लाने के प्रयास
करने आदि कई बिंदुओं पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
स्कूल की वार्डन
सुनीता त्रिपाठी, अरुणा शुक्ला, कविता कटियार व शारजा बानो ने महिलाओं को
बेटियों के भविष्य और उनके महत्व पर जोर देते हुए बेहतर शिक्षा पर ध्यान
देने की बात कही। इसके बाद बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत विद्यालय में
गीत-संगीत व निबंध लेखन प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी
छात्राओं ने प्रतिभाग किया।