सूखा पड़ने के कारण अबकी धान पतला हो गया है। पतला
धान और हाइब्रिड धान की खरीद सरकारी केंद्रों पर नहीं की जा रही हैं। इससे
किसान आढ़तियों को धान बेंचने को मजबूर हो रहे है, वहीं सरकारी केंद्र पर
सन्नाटा पसरा हुआ है।
कृषि उत्पादन मंडी समिति परिसर में संभागीय खाद्य
नियंत्रक विभाग का एक मात्र धान खरीद केंद्र है। इस वर्ष खरीद की दर दो
प्रकार से है। कॉमन धान की कीमत 1410 रुपये क्विंटल और ग्रेड ए का धान 1450
रुपये क्विंटल हैं। वहीं नमी 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस बार ए
ग्रेड का धान आ ही नहीं पा रहा है। केंद्र पर सन्नाटा पसरा है।
क्रय
केंद्र प्रभारी एवं एसएमआई राजकुमार चौधरी ने बताया कि इस वर्ष 7 मीट्रिक
टन खरीद का लक्ष्य मिला है। इसकी अंतिम तिथि 31 जनवरी है। अब तक 3324
क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है। किसानों को भुगतान चेक और बैंक खाते में
आरटीजीएस से किया जा रहा है।
बताया कि इस बार सूखा पड़ने से एक क्विंटल धान
में मानक के अनुसार 67 किलो चावल नहीं मिल रहा हैं। शासन का जोर मोटे धान
की खरीद पर है। उन्होंने बताया कि किसान हाइब्रिड धान पैदावार कर रहा है,
इसका धान महीन होता है। धान मिलों से जब चावल कुट कर भंडार निगम में जमा
कराया जाता है तो अधिक टूटे चावल की लाटें वहां पर फेल कर दी जाती हैं। ऐसे
में सिर्फ मोटा धान खरीदना मजबूरी है।