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सपा के चक्रव्यूह को भेदने की जंग

Fri, 22 Jan 2016 12:15 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
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सम्राट हर्षवर्धन और राजा जयचंद की नगरी कन्नौज में अब ब्लाक प्रमुख पद की कुर्सी के लिए जंग छिड़ गई है। एक तरफ जहां सत्ताधारी सपा ने इस चुनाव को प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए अन्य दलों का सूपड़ा साफ करने को मोर्चा खोल दिया है, वहीं भाजपा व बसपा विचार मंथन में जुटी है कि आखिर सरकार के पावर से पावरफुल हुई सपा के चुनावी चक्रव्यूह को कैसे तोड़ा जाए।
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कौन किस पर भारी पड़ेगा, यह तो आने वाला वक्त तय करेगा पर कोशिश हर कोई करने में जुटा है। आठों ब्लाकों में ब्लाक प्रमुख पद के प्रत्याशियों के लिए गहमागहमी तेज हो गई है। सपा ने आवेदन करने वाले 15 नेताओं के नाम की सूची हाईकमान को भेज दी है।

24 जनवरी को कानपुर मंडल पर प्रदेश अध्यक्ष एवं सीएम अखिलेश यादव चर्चा करेंगे। इस दौरान वह जिसके नाम पर हरी झंडी दे देंगे, वही ब्लाक प्रमुख पद के लिए सपा का उम्मीदवार बनेगा। जिलाध्यक्ष मुन्ना दारोगा ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को चुनाव लड़ने का अधिकार है, इसलिए एक ब्लाक में कई पार्टी नेताओं ने आवेदन किया है, पर जब सीएम जिसे भी उम्मीदवार घोषित कर देंगे उसे जिताने में पूरी पार्टी एक होकर एड़ी-चोटी तक का जोर लगा देगी।
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यहां पार्टी को बगावत का डर नहीं है। बसपा के वरिष्ठ नेता जोनल कोआर्डिनेटर सतीश चंद्र जाटव 22 जनवरी को जिला मुख्यालय पर पार्टी पदाधिकारियों संग बैठक लेंगे। बसपा ने बताया कि इसमें तय होगा कि ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव में प्रत्याशी उतारे जाएं या नहीं? दावेदारों के नामों और चुनाव लड़ने की स्थिति में उनके जीतने के कितने आसार हैं, यह विषय भी चर्चा में रहेगा।

उधर, भाजपा ने ब्लाक प्रमुख पद का चुनाव दमदारी से लड़ने का ऐलान तो कर दिया है, पर प्रत्याशी के नाम को लेकर अभी उसने पत्ते नहीं खोले हैं। अंदरखाने भाजपा दमदार उम्मीदवारों की तलाश में जुटी है जो सपा की चालों को काटते हुए ब्लाक प्रमुख पद की जंग में जीतकर कमल खिला सके।

उधर, वीवीआईपी जिले में ब्लाक प्रमुख पद के चुनाव में धनबल के हथियार का इस्तेमाल होने के फिलहाल कोई आसार नहीं हैं। मौजूदा समय में उसी के जीतने की संभावनाएं सबसे ज्यादा नजर आ रही हैं जिसे सत्ता पक्ष से टिकट मिल जाएगा। आठ ब्लाकों की तुलना में सपा से आवेदन सवा दर्जन लोगों ने किए हैं।

ऐसे में पार्टी का सारा जोर सर्वसम्मति बनाने पर चल रहा है। इसके लिए पदाधिकारियों से लेकर विधायकों तक को लगाया गया है। सूत्रों की मानें तो प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मोहर सीएम लगाएंगे। ऐसे में जिनका टिकट कटेगा, उनके मैदान में आने का मतलब है पार्टी से बगावत व सीएम के फैसले को न मानना।

वहीं जिला पंचायत के चुनाव में 11 दावेदारों में से एक प्रत्याशी चुनने के बाद उसे जिताकर सपा ने ताकत का अहसास भी करा दिया है। राजनैतिक गलियों में ब्लाक प्रमुख के चुनाव को लेकर गांवों या बीडीसी के आसपास कोई चक्कर लगाता नजर नहीं आ रहा है। जो दावेदार हैं वे अभी पूरा जोर प्रत्याशी बनने पर लगाए हैं।

वहीं क्षेत्र पंचायत सदस्य मायूस नजर आ रहे हैं। नाम न छापने पर एक बीडीसी ने बताया कि चुनाव में भारी खर्च किया था, पर अब कोई पूछ नहीं रहा है। वे चाहते हैं कि कई दावेदार मैदान में उतरें, क्योंकि ऐसी स्थिति में ही खरीद फरोख्त होती है। फिलहाल बीडीसी से संपर्क अभियान ही ठंडा पड़ा है।
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