सदर विकास खंड क्षेत्र के गांव बेहरिन में चल रही
श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन रुक्मणी विवाह और सुदामा चरित्र की लीला
सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। इस दौरान जयकारे गूंजते रहे। कथा के बाद
भंडारे में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
बेहरिन में नवनिर्मित
शिवशंकर मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए कथा वाचक शक्तिपुत्र
हृदयेश शुक्ल ने कहा कि भगवान कृष्ण व सुदामा सच्चे मित्र थे। द्वारिका के
राजा बनने के बाद भी भगवान श्रीकृष्ण अपने बाल सखा सुदामा को नहीं भूले।
यही वजह रही कि जब सुदामा गरीबी से परेशान होकर द्वारिका पहुंचते हैं तो
भगवान उनको लेने खुद नंगे पांव दौड़ पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान सदैव
अपने भक्तों के साथ खड़े रहते हैं। उनकी परीक्षा भी लेते हैं। जब भगवान की
कृपा होती है तो सुदामा की तरह एक झटके में उनके सारे दुख दूर हो जाते
हैं।
भागवत कथा के समापन के बाद विशाल भंडारा आयोजित किया गया। हवन पूजन के
दौरान आहुतियां दी गईं। इसमें समाज में सुख, शांति व समृद्धि की कामना की
गई। आसपास के कई गांवों के लोग कथा सुनने पहुंचे और पूजा अर्चना की। इस
मौके पर बृजेश अवस्थी, काशीनाथ शर्मा, सुनील अवस्थी, सुमित और आदित्य
सक्सेना आदि मौजूद थे।