राजा हरिश्चंद्र की नौटंकी का मंचन करते कलाकार
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गुलाब बाई की स्मृति में गुलाब थियेटर कंपनी कानपुर व संगीत नाटक अकादमी की ओर से ठठिया में चल रहे कार्यक्रम का गीत, संगीत और नृत्य के बीच समापन हो गया। कार्यक्रम के अंतिम दिन मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ व बुंदेलखंड की संस्कृति, कला, लोक नृत्य, लोक गीत, आल्हा गायकी ने लोगों को लुभाया। राजा हरिश्चंद्र की नौंटकी के मंचन के दौरान दर्शकों के आंसू छलक पड़े। वहीं आल्हा में गायिका रूबी की नदी बेतवा की लड़ाई में सुर और ताल का नायाब संगम देख पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी लोगों को अपने क्षेत्र, प्रदेश, देश की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने की अपील की। ठठिया के फू लमती मंदिर परिसर में चल रहे देशज के अंतिम दिन आल्हा गायक रूबी सिंह राजपूत ने अपने निराले अंदाज में बेतवा की लड़ाई का मार्मिक वर्णन कर अपनी कला का लोहा मनवा लिया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की राग छत्तीसा नाचा पार्टी ने लबरा समधी (नाचा गम्मत) प्रस्तुत कर कला और संस्कृति की झलकियां प्रस्तुत की।
इसी क्रम में मध्य प्रदेश के कलाकारों ने बुंदेली राई नृत्य प्रस्तुत कर बुंदेलखंड की संस्कृ ति और कला की झलकियां दिखाई । कार्यक्रम के अंत में गुलाब थियेटर कानपुर ने राजा हरिश्चंद्र की नौंटकी का स्टेज पर सजीव चित्रण कर दिखाया। कलाकारों का अनूठा अभिनय देख दर्शकों के आंसू भी झलक पड़े। कार्यक्रम के समापन पर संचालन कर रहे जैनेंद्र सिंह ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान खेमचंद्र यदुवंशी, शकुंतला देवी, रोशनी प्रसाद शर्मा, नंदा देवी, उमेश कुमार शर्मा, मुन्ना मास्टर, राजेंद्र चावला, मधु अग्रवाल आदि मौजूद रहे।