‘आला अफसर‘ नाटक में जलवे बिखेरते कलाकार।
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भ्रष्टाचार ने हमारी जड़ों को खाना शुरू कर दिया है। हमें इसका इलाज ढूंढना है। इसके बड़े कीड़े को रोकना है। मंच पर चल रहे नाटक ‘आला अफसर’ के पात्रों ने देश में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से समाज में इसके दौड़ने की गति को दिखाया और इसके प्रभाव से अपंग हो रहे समाज का स्वरूप को भी दिखाया। कलाकारों की उम्दा कला का मंच पर प्रदर्शन देख दर्शकों ने कला और कलाकारों के अभिनय की तालियां बजाकर सराहना की।
ठठिया में चल रहे संगीत नाटक अकादमी व गुलाब थियेटर कंपनी के ओर से आयोजित कार्यक्रम में दूसरे दिन रविवार को भी कार्यक्रम का लुत्फ उठाने स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ती रही। कार्यक्रम की शुरुआत नक्कारा वादन से हुई तो शेख चिल्ली का विवाह होता देख लोगों ने ठहाके भी लगाई। इस दौरान विनोद रस्तोगी स्मृति संस्था इलाहाबाद की ओर से ‘आला अफसर’ नाटिका प्रस्तुत की गई। सामाजिक बुराइयों को दर्शाने वाली इस कला की सभी ने खुलकर सराहना की।
अभिनय ने दौरान कलाकारों ने सरकारी कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार को दिखाया तो वहीं नाटक के दूसरे भाग में ईमानदारी से काम कराने के लिए भटकते युवक की परेशानियां भी दिखाईं। सभी ने इस कार्यक्रम का तालियां बजाकर स्वागत किया। कलाकारों ने सरकारी अफसरों पर अन्य लोगों ने देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की अपील भी की।