संत निरंकारी भवन में हुए सत्संग में चेन्नई से आए
महात्मा आरपी सिंह ने कहा कि प्रभु की भक्ति में भेदभाव, ऊंच-नीच के लिए
स्थान नहीं है। भक्ति तो प्रभु के प्रति हार्दिक प्रेम पर टिकी है।
उन्होंने
कहा कि निराकार प्रभु परमात्मा के साथ जिसका नाता जुड़ जाता है, उसके जीवन
में प्रेम का उदय हो जाता है। जिसका नहीं जुड़ता, उसके जीवन से हमें कभी
भी प्रेम की शीतलता प्राप्त नहीं होती। हमें उससे सदैव कठोर व्यवहार ही
मिलता है। हर इंसान को प्रभु परमात्मा के साथ नाता जोड़ना चाहिए, तभी उसके
जीवन में अनंत प्रेम का उदय होगा।
हम पूजा पाठ करते हैं, दान करते हैं।
पूछने पर उत्तर मिलता है प्रभु को खुश करना चाहते हैं तो क्या प्रभु इन
बातों से ही खुश हो जाएगा। नहीं, प्रभु के वंदों से जब तक प्रेम नहीं किया
जाएगा, तब तक प्रभु को खुशी नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि निराकार
परमात्मा से प्रेम का आनंद तो प्रेमी ही जानता है। उन्होंने कहा कि ढाई आखर
प्रेम का पढ़ै सो पंडित होय।
वास्तव में वही पंडित है, जिसके अंदर प्रेम
बसा है। अगर प्रेम करना नहीं सीखा तो पंडित, ज्ञानी या संत कभी नहीं बन
सकते। महात्मा राकेश राठौर के संचालन में हुए कार्यक्रम में सुशील बाबू,
राजकुमार गुप्ता, मुन्ना लाल, रामगोपाल, रामकृपाल, कमलेश, रवींद्र,
वीरेंद्र शर्मा, अन्नपूर्णा, विमला, मालती, रश्मी, जय देवी, जसोदा, रामा
देवी, सोनी वर्मा ने भी संगत को निहाल
किया।