विकास भवन में जिला स्तरीय रवी गोष्ठी व कृषक मेले का
आयोजन हुआ। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में किसानों ने प्रतिभाग किया।
गोष्ठी के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को उत्पादकता बढ़ाने के तरीके
बताए। साथ ही किसानों से आह्वान किया कि वह अपने खेतों में हरी खाद का
प्रयोग अधिक करें। ताकि भूमि की उर्वरकता को बढ़ाया जा सके।
डीएम अनुज
झा ने कहा कि गत वर्ष रबी की फसल में किसानों का काफी नुकसान हुआ था। वर्षा
कम होने से किसानों को सिंचाई की सुविधा के लिए नहरों का संचालन सुचारु
रूप से किया जा रहा है। कहा कि धान की बिक्री के लिए केंद्रों की स्थापना
कर दी गई है। किसान कहीं भी केंद्र पर अपने धान की बिक्री कर सकता है।
उन्होंने कहा कि रबी की फसल के लिए बीज व खाद की पर्याप्त मात्रा है। यदि
किसी किसान को इसमें किसी तरह की दिक्कत आती है तो जिला कृषि अधिकारी अथवा
उनके कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है। उद्यान विभाग की योजनाओं का
लाभ पाने के लिए किसान पंजीकरण कराकर लाभ प्राप्त करें।
जिले में जल
संरक्षण योजना संचालित की जा रही है। 195 तालाब जल संरक्षण के लिए खुदवाए
गए हैं। कहा कि मनरेगा से लेमन ग्रास की खेती कराई जा रही है। सौरिख,
हसेरन व उमर्दा के 160 ग्रामों में पांच हजार एकड़ में लेमन ग्रास का रोपण
किया जाएगा। जिले में 30 हजार एकड़ का दुग्ध प्लांट स्थापित किया जा रहा
है।
इससे पहले किसान मेला में लगाए गए कई विभागों के स्टालों का निरीक्षण
किया। स्प्रेयर तथा सिंचाई के लिए 60 किसानों को प्लास्टिक जीन भी प्रदान
की गई। गोष्ठी में सीडीओ उदयराज यादव ने कहा कि किसान पारदर्शी योजना में
अपना पंजीकरण कराकर कृषि योजनाओं एवं निवेशों का लाभ उठाए।
उन्होंने कहा कि
तीन वर्षों में सिंचाई के लिए 53 नलकूप स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कृषि
के साथ पशुपालन का कार्य कर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। इस
मौके पर भूमि संरक्षण अधिकारी अशोक कुमार, जिला कृषि अधिकारी नीरज रान,
परियोजना निदेशक एके सिंह कुशवाहा, जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव,
मत्स्य अधिकारी जीसी यादव समेत अन्य विभागों के अफसर मौजूद थे। उधर, धनतेरस
का त्योहार होने से गोष्ठी में किसानों की संख्या बेहद कम रही।