फटे जूते दिखाते प्राइमरी स्कूल के छात्र और छात्राएं।
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तिर्वा(कन्नौज)। परिषदीय स्कूलों में अगस्त माह में छात्र-छात्राओं को बांटे गए जूते बीच में ही धोखा दे गए। छात्र कहीं बिना जूते तो कहीं फटे जूते पहनकर स्कूल पहुंच रहे हैं। इससे ठंड के मौसम में बच्चों को परेशान होना पड़ रहा है। वहीं बीएसए का कहना है कि बच्चे घर में भी जूते पहनते हैं। इसकी वजह से यह जल्दी फट गए।
सरकार बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। अफसरों के जिम्मेदार न होने से सरकारी योजनाएं दम तोड़ रही हैं। सरकारी स्कूलों में बांटे गए जूतों की खरीद में घालमेल किया गया है। उमर्दा ब्लॉक में प्राथमिक विद्यालय 262 व जूनियर स्कूल 97 हैं। इनमें करीब 28,750 छात्र-छात्राओं का पंजीकरण है। बेसिक शिक्षा विभाग ने छात्र-छात्राओं को अगस्त में जूतों व मोजों का वितरण करवाया था। यह जूते पूरे सत्र भी नहीं चले। शीतलहर के दौरान उमर्दा ब्लॉक के कई स्कूलों में छात्र-छात्राओं के जूते फट गए। इसकी वजह से छात्र फटे जूते पहनकर आ रहे हैं।
एक प्रधानाध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जूतों की गुणवत्ता सही नहीं थी। विद्यालय में अध्ययनरत कई छात्रों के जूतों के सोल टूट गए हैं। यह ऊपर से फट गए। वहीं बीएसए केके ओझा ने बताया कि जूतों के वितरण को अधिक समय नहीं हुआ है। छात्र स्कूल के बाद घरों में जूतों का प्रयोग करते होंगे। इससे यह जल्द फट गए। जिले के किसी भी स्कूल से जूते फटने की शिकायत नहीं आई है।