ठठिया। सुर्सी ग्राम पंचायत में विकास के नाम पर पिछले पांच सालों में 1.35 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन गांव की हालत आज भी दो दशक पुरानी ही है। आबादी बढ़ती गई मकान बनते गए, लेकिन नहीं बन पाई तो वह गांव में सड़क, पानी निकासी के लिए नाली। आज भी ग्रामीणों को कच्ची गलियों में जलभराव व कीचड़ के बीच से निकलना पड़ रहा है।
ग्राम सुर्सी के ग्रामीणों का कहना है कि बीती कई पंचवर्षीय कार्यकाल में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी उन्हें मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। न तो सड़क बनी और न ही पेयजल, नाली, शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी हुईं। यह पहली बार नहीं है जब ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है। पहले भी कई कार्यकाल गुजर गए, लेकिन विकास कागजों तक ही सीमित रह गया। गांव की अधिकतम गलियां आज भी कच्ची जगह-जगह गड्ढे और कीचड़ से आवागमन मुश्किल है। बरसात के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को परेशानी उठानी पड़ती है। आरोप है कि पंचायत सचिव और प्रधान समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती। हर बार चुनाव से पहले विकास का सपना दिखाया जाता है, लेकिन विकास गांव से कोसों दूर है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार कागजों पर विकास की गाथा गा रही है, जबकि जमीनी स्तर पर जिम्मेदारों ने पलीता लगा रखा है। सवाल यह है कि 1.35 करोड़ रुपये आखिर कहां खर्च हुए, जब तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक गांव की तस्वीर बदलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। बीडीओ सोनिया श्रीवास्तव ने बताया कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।