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Kannauj News: सुनवाई का अवसर न देने पर एसडीएम का आदेश निरस्त

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कन्नौज। जमीन विवाद से जुड़े एक अहम मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने छिबरामऊ एसडीएम के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने माना कि मामले में सभी आवश्यक पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना आदेश पारित किया गया, इसलिए प्रकरण की नए सिरे से सुनवाई की जानी चाहिए।
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मामला गुरसहायगंज थाना क्षेत्र के रसूलपुर गांव से संबंधित है। शिवानंद, प्रवीण उर्फ रिंकू और मुन्नी देवी ने एसडीएम छिबरामऊ के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें गाटा संख्या 435 ख पर बनी दीवार हटाने तथा वादी आनंद तिवारी के कब्जे में हस्तक्षेप न करने का निर्देश दिया गया था। सुनवाई के दौरान पुनरीक्षणकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि मुन्नी देवी गाटा संख्या 442 की सह-हिस्सेदार हैं, लेकिन उन्हें मूल कार्रवाई में पक्षकार बनाकर सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। इससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है। वहीं विपक्ष की ओर से दावा किया गया कि विवाद गाटा संख्या 435 ख का है, जो आबादी भूमि के रूप में दर्ज है। जिला जज नरेंद्र कुमार झा ने अभिलेखों का परीक्षण करते हुए पाया कि गाटा संख्या 442 के क्षेत्रफल को लेकर राजस्व अभिलेखों और तहसीलदार की रिपोर्ट में अंतर है। साथ ही एसडीएम के आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि विवादित दीवार वास्तव में गाटा संख्या 435 ख पर या गाटा संख्या 442 पर बनी है। न्यायालय ने इन तथ्यों को महत्वपूर्ण मानते हुए एसडीएम का आदेश निरस्त कर दिया। अदालत ने प्रकरण को पुनः एसडीएम छिबरामऊ के पास भेजते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि मुन्नी देवी को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए। साथ ही दोनों गाटा संख्याओं के वास्तविक क्षेत्रफल, राजस्व अभिलेखों एवं विवादित भूमि की स्थिति का स्थलीय परीक्षण कर तथ्यों के आधार पर नया आदेश पारित किया जाए।
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