जिले में चुनाव की दहलीज पर सपा की राजनीति उलझती जा रही है। पिता-पुत्र के दंगल का असर चुनाव के मैदान पर दिखाई दे रहा है। प्रत्याशी और उनके समर्थकों में निराशा और खामोशी है। किसी को सिंबल छिन जाने का भय सता रहा है तो कोई गुटबाजी की भेंट चढ़ने से घबरा रहा है। इसी उधेड़बुन में सपा अपने चुनावी अभियान को हवा नहीं दे पा रही है। वहीं, बसपा खामोशी से निचले कैडर के सहारे कन्नौज की सरजमीं पर कुछ चमत्कार करने की फिराक में है। भाजपा भी सपा की खींचतान के परिणाम पर नजर लगाए हुए है।
विधानसभा चुनाव में सपा ने जिले की सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। जिसमें सदर सीट से अनिल दोहरे, तिर्वा सीट से विजय बहादुर पाल, छिबरामऊ सीट से अरविंद प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है। प्रत्याशियों में चुनावी गणित अभी भी उलझी हुई है। चुनाव चिह्न को लेकर अखिलेश व मुलायम में जंग छिड़ी हुई है। जिससे अखिलेश व मुलायम समर्थक अपनी रणनीति नहीं तय कर पा रहे हैं।
सभी को विवाद न थमने पर चुनाव चिह्न की चिंता सता रही है, तो साइकिल चिह्न को लेकर उपजे विवाद का असर सपा में गुटबाजी पैदा कर चुनाव में नुकसान भी पहुंचा सकता है। सपा के मतदाता भी दो धड़ों में बंट सकते हैं। जिसका फायदा दूसरा राजनीतिक दल उठा सकता है। इस पर प्रत्याशियों की चिंताएं भी बढ़ी हैं। फिलहाल सभी सपा की कलह थमने का इंतजार है।