डीएम शुभ्रांत शुक्ल ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए शासन से बजट की भी मांग की गई है। जल्द चंदन तेल का विकल्प तैयार कराकर व्यापारियों को फार्मूला दिया जाएगा। इत्र एवं अतर एसोसिएशन अध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने बताया कि चंदन का तेल मौजूदा समय विदेशों से एक लाख 30 हजार में खरीदना पड़ रहा है। चंदन तेल का बेस मिलने से इत्र कारोबार को कम लागत में नई दिशा मिलेगी।
इसलिए बेस की पड़ी जरूरत
शहर में सदियों से इत्र कारोबार हो रहा है। पहले कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और असम से चंदन की लकड़ी की खरीद कर तेल निकालते थे। इन राज्यों में चंदन के पेड़ का कटान होने के बाद रोपण नहीं हुआ। इससे व्यापारियों को अब आस्ट्रेलिया, अफ्रीका और तंजानिया से चंदन का तेल मंगाना पड़ रहा है। यहां से वनों का कटान होने से महंगाई बढ़ गई। इससे अब व्यापारी चंदन तेल के विकल्प की मांग कर रहे हैं।