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Kannauj: चंदन के बेस पर शोध शुरू, जल्द महकेगा इत्र कारोबार, विकल्प मिलने पर समाप्त होगी निर्भरता

Tue, 24 Jan 2023 11:34 PM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कन्नौज

सार

सीमैप और आईआईसीटी हैदराबाद के सहयोग से चंदन के तेल के विकल्प पर शोध शुरू किया गया है। बता दें कि विकल्प मिलने पर आस्ट्रेलिया, अफ्रीका और तंजानिया से निर्भरता समाप्त होगी।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सब कुछ ठीक रहा, तो जल्द इत्र कारोबार दुनिया तेजी से फैलेगा। महंगे दामों में चंदन तेल के बेस के शोध पर काम शुरू हुआ। शोध सफल होने पर कम लागत से खुशबू कारोबार संभव होगा। एफएफडीसी को सीमैप और आईआईसीटी हैदराबाद को चंदन तेल के बेस पर शोध करने की जिम्मेदारी दी गई है।

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अमर उजाला ने 18 जनवरी के अंक में चंदन की महंगाई से इत्र कारोबार पड़ा ठंडा शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया था कि आस्ट्रेलिया, अफ्रीका और तंजानिया से आने वाले चंदन तेल की कीमतें बढ़ गई। इससे व्यापारियों को चंदन तेल का बेस (विकल्प) की दरकार है।
डीएम शुभ्रांत शुक्ल ने इसका संज्ञान लिया। डीएम के निर्देश पर एफएफडीसी (सुंगध एवं सुरस विकास केंद्र) के निदेशक शक्ति विनय शुक्ल ने सीमैप (केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान) लखनऊ और आईआईसीटी (इंडियन इंस्टीट्यूट) हैदराबाद आंध्र प्रदेश के साथ चंदन तेल के विकल्प को खोजने के लिए शोध शुरू कर दिया।

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डीएम शुभ्रांत शुक्ल ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए शासन से बजट की भी मांग की गई है। जल्द चंदन तेल का विकल्प तैयार कराकर व्यापारियों को फार्मूला दिया जाएगा। इत्र एवं अतर एसोसिएशन अध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने बताया कि चंदन का तेल मौजूदा समय विदेशों से एक लाख 30 हजार में खरीदना पड़ रहा है। चंदन तेल का बेस मिलने से इत्र कारोबार को कम लागत में नई दिशा मिलेगी। 

इत्र कारोबार पर एक नजर
  • शहर में करीब 300 इत्र कारखाने हैं।
  • छोटे-बड़े करीब 25 हजार लोग इत्र कारोबार से जुड़े हैं।
  •  सालाना करीब 500 से 600 करोड़ रुपये का व्यापार होता है।
  • सरकार को 50 से 70 करोड़ का टैक्स मिलता है।
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इसलिए बेस की पड़ी जरूरत
शहर में सदियों से इत्र कारोबार हो रहा है। पहले कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और असम से चंदन की लकड़ी की खरीद कर तेल निकालते थे। इन राज्यों में चंदन के पेड़ का कटान होने के बाद रोपण नहीं हुआ। इससे व्यापारियों को अब आस्ट्रेलिया, अफ्रीका और तंजानिया से चंदन का तेल मंगाना पड़ रहा है। यहां से वनों का कटान होने से महंगाई बढ़ गई। इससे अब व्यापारी चंदन तेल के विकल्प की मांग कर रहे हैं।
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