कन्नौज। जिला जेल अनौगी में सात साल बाद भी जैमर नहीं लगे हैं। इसका फायदा कैदी उठा रहे हैं। जेल अधिकारियों की सुस्ती से संगीन अपराधों में बंद कैदी जेल के अंदर बैठकर मोबाइल से बात करने के साथ ही इंटरनेट का प्रयोग करते हैं। छापामारी में इनसे मोबाइल बरामद हो चुके हैं। यह अपराधियों से संपर्क कर गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
जिला जेल अनौगी में 2012 से कैदियों और बंदियों को रखना शुरू हुआ। जेल में कैदियों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हो चुकी हैं। सूबे की अन्य जेलों में टूजी जैमर की जगह फोरजी लगाए जा रहे हैं। जिला जेल में अभी टूजी जैमर तक नहीं लगा है। कैदी और बंदी मोबाइल का प्रयोग कर रहे हैं। इंटरनेट का भी आनंद लेते हैं।
सूत्रों के मुताबिक बंदी रक्षकों की मिलीभगत से कैदियों और बंदियों तक मोबाइल पहुंचाया जाता है। छापामारी के दौरान यह मोबाइल बैरक में छिपा देते हैं। जेलर शिवकुमार यादव ने बताया कि शासन स्तर से जैमर लगाए जाते हैं। जैमर लगवाने के लिए कई बार आलाधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। बैरकों के साथ कैदियों की जामा तलाशी भी होती है।
इस तरह काम करता है जैमर
जैमर एक डिवाइस है। जगह-जगह इन डिवाइसों को लगाया जाता है। इसके ऑन करने पर निर्धारित रेंज तक मोबाइल में नो सिग्नल लिखकर आता है। इसके बाद मोबाइल में नेटवर्क चले जाते हैं। इससे मोबाइल पर बात करने के साथ कोई भी नेट नहीं चला सकता है।