तहसील के अधिवक्ता वीर सिंह भदौरिया की गिरफ्तारी के विरोध में तहसील के अधिवक्ताओं का धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को वकीलों ने तहसील के मुख्य गेट पर ताला डाल दिया। घूम-घूमकर सभी कार्यालय बंद करा दिए। तहसील परिसर में जुलूस निकालकर पुलिस प्रशासन के विरोध में नारे लगाए। बाद में सभी वकील एकजुट होकर गेट के सामने तिर्वा-कन्नौज मार्ग पर धरना देकर बैठ गए। इससे रोड जाम हो गया।
वकीलों के शुक्रवार को होने वाले प्रदर्शन को लेकर जिला प्रशासन शुक्रवार सुबह से ही एलर्ट था। सुबह दस बजते ही तिर्वा कोतवाली प्रभारी आरपी पांडेय कई उप निरीक्षकों व सिपाहियों के साथ तहसील गेट पर पहुंच गए। भारी पुलिस बल को देख पहले तो वकीलों का उत्साह डगमगाया पर कुछ देर बाद धरना प्रदर्शन की तैयारी शुरू हो गई।
कई वकील तहसील के मुख्य गेट पर पहुंचे। यहां जबरन गेट बंद कर ताला लगा दिया। बाद में घूम-घूमकर एसडीएम आफिस, एसडीएम कोर्ट, तहसीलदार आफिस, तहसीलदार कोर्ट, नायब तहसीलदार कोर्ट, उप निबंधक कार्यालय, आरके दफ्तर, कंप्यूटरीकृत खतौनी दफ्तर बंद करा दिए। बाद में सभी वकील एसडीएम कोर्ट के बाहर धरना देकर बैठ गए।
इसके बाद वकीलों का समूह नारेबाजी करता हुआ तहसील गेट से बाहर आया। यहां वकीलों ने सड़क पर धरना देकर जाम लगा दिया। करीब आधा घंटे तक चले रोड जाम के दौरान वकील वीर सिंह को तत्काल रिहा करने की मांग की गई। रिहाई न होने तक कामकाज का बहिष्कार का एलान किया। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई।
धरना स्थल पर मौजूद कोतवाल ने वकीलों को समझाने का प्रयास किया पर वकील नहीं माने। कुछ देर बाद सीओ सुरेंद्र पाल सिंह मौके पर पहुंचे। इस पर अधिवक्ताओं के प्रतिनिधि मंडल ने एसपी को संबोधित एक ज्ञापन सीओ को सौंपा। इस दौरान हरीशंकर राजपूत, कमलेश पाल, परमानंद तिवारी, संजय शुक्ला, कलक्टर सिंह यादव, नीरज त्रिपाठी, ब्रजेश शुक्ला, मुन्नू सिंह यादव, संजीव तिवारी, सतीश राजपूत, राजा अवस्थी, अनिल वर्मा, राजेंद्र प्रकाश राजपूत सहित कई वकील मौजूद रहे।