उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने हकों और
हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए गुरुवार को प्रदेश सरकार को जमकर कोसा।
कलक्ट्रेट परिसर के पास एडीएम आवास के सामने दो दिवसीय धरना शुरू किया।
पहले दिन कई घंटे तक भाषणबाजी का दौर चला।
इस विरोध प्रदर्शन के कारण पूरे
दिन अभियंता साइडों पर नहीं गए, जिससे विभाग में कामकाज बाधित रहा। इंजीनियरों
की मुख्य मांग वेतन ग्रेड 4800 प्रदान करने के साथ ही राजपत्रित अधिकारी
घोषित करने की रही। इस दौरान कई घटकों के इंजीनियरों ने कंधे से कंधा
मिलाया।
दो-टूक लहजे में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की सरकार ने और
अनदेखी की तो आंदोलन और तेजी पकडे़ेगा। 15, 16 व 17 फरवरी को लखनऊ मुख्यालय
पर तीन दिवसीय प्रदेश स्तरीय क्रमिक अनशन करने भी जाएंगे। फिर भी सुनवाई न
हुई तो बेमियादी हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
महासंघ के अध्यक्ष राममहेश
वर्मा, जनपद सचिव मकरंद सिंह यादव, संगठन सचिव अशोक कुमार, लेखा संप्रेक्षक
अंकुर सक्सेना, विनोद यादव, बृजेंद्र मोहन, सुनील आनंद, मुन्ना प्रसाद,
वीरेंद्र प्रताप ने कहा कि महासंघ के बैनर तले इंजीनियर एकजुट हैं। अब अपना
हक लेकर ही रहेंगे। कहा कि सरकार को उत्पीड़नात्मक रवैया तत्काल बंद कर
देना चाहिए।
इंजीनियर वीरेंद्र प्रताप, राजीव, बृजेश, सुरेंद्र सिंह
राजपूत, ओमपाल सिंह, अरुण कुमार, एमपी सिंह, जमुना प्रसाद, अमन वर्मा ने
कहा कि सेवा प्रावधानित अवधि सात वर्ष, 14 वर्ष व 20 वर्ष की पूरी होने पर
क्रमश: एई, एक्सईएन, अधीक्षण अभियंता के पदों पर पदोन्नतियां दी जाएं।
वाहन
भत्ता के रूप में 30 लीटर पेट्रोल के मूल्य की धनराशि प्रदान की जाए। धरना
प्रदर्शन के दौरान उत्कर्ष शुक्ला, आदर्श बाबू कटियार, विजय प्रताप सिंह,
चांदनी यादव, अक्षय, अखिलेश यादव, सौरभ शुक्ला, प्रभात गुप्ता, उदय कुमार,
रामप्रकाश पाल, हाकिम सिंह, दीपचंद्र, राहुल यादव आदि मौजूद थे।
धरना
प्रदर्शन की अध्यक्षता संघर्ष समिति के अध्यक्ष राममिलन ने की। राज्य
कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष डा. अशोक सविता भी धरने में शामिल
रहे।