प्रदेश सरकार की रोक के बावजूद पालीथिन का इस्तेमाल
धड़ल्ले से हो रहा है। शुक्रवार को भी जगह-जगह पालीथिन के अंदर लोग सामान
ले जाते हुए नजर आए। वहीं दुकानदार यह कहते हुए पालीथिन देते रहे कि अभी
पुराना स्टाक रखा है। वहीं मार्केट में लिफाफा भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसी
स्थिति में पालीथिन का प्रयोग अभी मजबूरी में कर रहे हैं।
रोडवेज बस
स्टैंड के पास स्थित परचून की दुकानों, फलों की ठेलियों में पालीथिन खुलेआम
रखी नजर आई। जूस बेंचने वालों के यहां भी पालीथिन का प्रयोग होता देखा
गया। जूस विक्रेता आलम ने बताया कि कुछ लोग दुकान पर ही जूस पीते हैं, तो
कुछ लोग घर ले जाते हैं। ऐसी स्थिति में घर तक जूस पहुंचाने के लिए पालीथिन
का प्रयोग करना पड़ता है।
अब धीरे-धीरे लोगों से घर से बर्तन लाने को कहा
जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि पालीथिन अभी से बंद कर देंगे तो दुकानदारी घट
जाएगी। वहीं तमाम लोग अस्पतालों में भर्ती व बीमारी से ग्रसित लोगों के लिए
भी जूस लेकर जाते हैं, जो बर्तन न होने के कारण मजबूरी में पालीथिन का
सहारा लेते हैं।
वहीं बीज की दुकानों पर भी पालीथिन में फुटकर बीज की
बिक्री होते दिखी। सब्जी मंडी बजरिया सरायमीरा के अलावा तिर्वा, ठठिया,
मानीमऊ, जसोदा, जलालाबाद क्षेत्र में भी पालीथिन खुलेआम चलते पाई गई। उधर,
समाचार पत्र वितरण आदर्श प्रकाश नरायन मिश्रा ने बताया कि पालीथिन पर रोक
लगने के बाद अखबार की रद्दी के भाव बढ़ेंगे।
वहीं एसडीएम सदर सुनील
कुमार शुक्ला ने कहा कि आज जुलूसे गौसिया निकलने के कारण पुलिस व राजस्व
विभाग के अधिकारी व्यस्त रहे। इसके अलावा कुछ आवश्यक मीटिंगें भी लगी थीं। बताया
कि इस वजह से पालीथिन का प्रयोग करने वालों के खिलाफ अभियान नहीं चलाया जा
सका। शनिवार को शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में उन दुकानों पर छापे मारे
जाएंगे, जहां पालीथिन का प्रयोग होता है या पालीथिन बेंची जाती है।
वहीं
लेखपालों, राजस्व निरीक्षकों, नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों व टीचरों से
भी लोगों को पालीथिन का प्रयोग न करने के लिए जागरूक भी किया जाएगा। नगर
पालिका के अधिशासी अधिकारी बीडी भट्ट ने बताया कि पालीथिन का प्रयोग बंद
होने से नालियों के चोक होने की समस्या कम होगी।
इससे गलियों में होने वाली
जलभराव की समस्या से भी लोगों को राहत मिलेगी। एडीओ पंचायत रामानंद यादव
ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पालीथिन का प्रयोग न करने के लिए जन
जागरूकता की पहल की जाएगी। बताया कि ग्राम प्रधानों और सचिवों को
निर्देश दिए गए हैं कि वे खुली बैठकों व गांवों में भ्रमण के दौरान बच्चे,
बुजुर्ग व महिलाओं को बताएं कि सरकार ने पालीथिन का प्रयोग प्रतिबंधित कर
दिया है।