जीटी रोड हाईवे पर सोमवार को बवाल के खौफ का असर दूर हो गया। सोमवार की
सुबह से ही दुकानें खुलीं। रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर भी सफर
करने के लिए पहुंचने वालों के झुंड नजर आए। पुलिस प्रशासन ने भी दुकानें
बंद कराने की बजाय लोगों के हौसले को बढ़ाया।
जीटी
रोड पर निजी चौपहिया वाहन भी सोमवार को आते-जाते रहे। रोडवेज बसें भी
बाईपास की बजाय शहर के अंदर से होकर निकलीं। नौकरीपेशा लोग घरों से तो सहमे
हुए निकले, पर आहिस्ता-आहिस्ता हिम्मत बढ़ती गई। पुरानी कचहरी गेट के
सामने फुटपाथ का सन्नाटा भी गायब हो गया। ठेलियों की कतारें सज गईं।
किसी
पर केला, सेब, जूस तो कहीं जमीन पर खील-खिलौने व गट्टे बिकते नजर आए।
लोहिया क्रासिंग चौराहे पर चश्मे की दुकान तो बगल में स्थित फोटो स्टूडियो
भी खुले। फोटोग्राफर आलोक शुक्ला ने बताया कि तीन दिन से कामकाज ठप था। घर
में बैठे-बैठे थक गए। सोमवार को दुकान खुली तो ऐसा लगा कि मानो जिंदगी पटरी
पर लौट आई है।
कई नौकरियों में आवेदन करने वाले युवक फोटो खिंचाने आए।
ग्राहकों को फोटो बनकर मिली तो वे खुश हुए, जबकि उन्हें मेहनताना मिला तो
चेहरा चमका। उधर, फल विक्रेता आमिर का कहना है कि गोदाम में रखे फल खराब हो
रहे थे। मार्केट खुली तो आढ़तियों की जान में जान आई।
बस अड्डे पर जनरल
मर्चेंट का सामान बेंचने वाले दुकानदार राजू मिश्रा ने कहा कि दंगे की मार
गरीब ही झेलते हैं। त्योहार नजदीक है, जिससे हजारों लोग तरह-तरह का समान
बेंचकर चार पैसे कमाते हैं। ऐसे में शहर में उपजे बवाल ने गरीबों को सबसे
ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। बस अड्डे पर दुकानें खुलीं तो ग्राहक भी घरों
से निकले।