अक्षय नवमी पर्व पर महिलाओं ने आंवला के पेड़ की विधि
विधान से पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की। नगर में जहां भी आंवला के पेड़
थे वहां सुबह से ही महिलाओं-बच्चों का मेला लगा रहा।
इसके बाद महिलाओं
ने परिवार सहित आंवले के पेड़ के नीचे घर से बनाकर लाए गए पकवान को बांटकर
खाया। कार्तिक माह में दीपावली से लेकर पूर्णिमा तक कई महत्वपूर्ण पर्व
आते हैं। इसमें अक्षय नवमी भी एक है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को
मनाए जाने वाले इस पर्व में आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है, इसलिए इसे
धात्री नवमी भी कहते हैं।
धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया हुआ दान व
पूजा पाठ अक्षय फल देता है, अर्थात इस दिन दिए हुए दान का कभी क्षय नहीं
होता। सुख व समृद्धि दायक इस पर्व पर महिलाएं आंवले के पेड़ की परिक्रमा
करते हुए उसके तने पर सूत का धागा लपेटती हैं, फिर उसके नीचे बैठ कर विधि
विधान से पेड़ की पूजा करती हैं।
शुक्रवार को सुबह से ही महिलाओं ने पहले
अपने घर में स्वादिष्ट भोजन तैयार किया, फिर उसे लेकर परिवार के साथ नगर के
सौरिख रोड स्थित बगिया, तालग्राम रोड स्थित शकुंतला देवी बालिका विद्यालय,
कैरदा रोड, मोहल्ला दीक्षितान व सरायदायमगंज रोड स्थित आंवला के पेड़ के
पास पहुंच कर पहले तो पूजा की, फिर प्रसाद चढ़ाने के बाद घर से लाए गए भोजन
को परिवार के साथ बैठकर ग्रहण किया।