शासन की रोक के बावजूद खुले में आलू फेंका जा रहा है। तिर्वा रोड व मुरैंया रोड पर कई ट्राली आलू रोड के किनारे सड़ रहा है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। आस-पास के लोगाें ने जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदकर आलू को दबाने की मांग की है।
आलू के दामों में गिरावट के बाद जब किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू लेने नहीं पहुंचा तो कोल्ड मालिकों ने उसे जीटी रोड के किनारे फिंकवाना शुरू कर दिया। मुरैंया गांव निवासी रामप्रकाश कहते हैं कि आलू रात के अंधेरे में फेंका जाता है। जिससे पता नहीं चल पाता है कि किसका आलू है। इन्हें मवेशी भी खा रहे हैं। इससे उनके बीमार होने की आशंका भी बढ़ गई है। वहीं, चेतराम सिंह कहते हैं कि प्रशासन को कोल्ड मालिकों पर शिकंजा कसना चाहिए। वहीं, गंगाराम ने कहा कि शीतगृह स्वामियों को लोगों का ध्यान रखते हुए इस खराब आलू को जमीन में दबा देना चाहिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एके पचौरी बताते हैं कि ऐसे खराब आलू को जमीन में गड्ढा कर दबा देना चाहिए, जिससे वह मिट्टी के साथ मिल जाए। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. विनोद त्रिवेदी बताते हैं कि यदि ऐसे सड़ रहे आलू को पशु खाते हैं तो उनके भी बीमार होने की आशंका बन जाती है। समय पर स्थिति में सुधार न हो तो मवेशी की जान भी जा सकती है।