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आलू उत्पादन में आई गिरावट

Mon, 16 Feb 2015 12:10 AM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
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खराब मौसम के कारण इस साल प्रति हेक्टेयर आलू उत्पादन में भारी गिरावट आई है। हालांकि इस गिरावट की भरपाई एरिया की बढ़ोत्तरी से काफी हद तक पूरी हो सकेगी। वहीं दूसरी ओर मंडी में आलू के दामों में कोई खास उछाल देखने को नहीं मिल रहा है। फिलहाल मंडी 350 से 380 रुपये के बीच टिकी है।
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पिछले वर्ष की तुलना में इस बार आलू प्रति बीघा 15 से 20 पैकेट कम निकल रहे हैं। जिसका प्रमुख कारण अधिक सर्दी बताया जा रहा है। इसके अलावा जिन खेतों में झुलसा रोग का प्रभाव अधिक रहा है, वह आलू दागी हो गया है। किसानों को इसका भाव कम मिलने की उम्मीद है।

आलू की मंडियों में बंपर खुदाई के साथ ही भाव में भी गिरावट आई है। सफेद आलू 350, चिप्सोना, हालैंड व नामचीज प्रजातियों का आलू 350 से 380 के बीच बिक रहा है। जबकि पिछले वर्ष इन प्रजातियों के आलू का भाव खेत में 450 रुपया पैकेट था।
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खुसटिया गांव के निवासी किसान ऋषभ कटियार का कहना था कि इस बार मौसम ने किसानों का काफी खेल बिगाड़ा है। मौसम की खराबी से पिछेती आलू की फसल करने वाले किसानों को सबसे अधिक नुकसान है। पिछेती आलू की पैदावार सबसे कम निकल रही है। अगेती आलू की फसल में प्रति बीघा 15 से 20 पैकेट की गिरावट आई है।

कहा लागत की बात की जाए तो प्रति बीघा दो बोरी डीएपी, एक यूरिया, दवा, पुटास, जिंक, सिंचाई, श्रमिक में करीब सात हजार रुपये प्रति बीघा का खर्चा आया है। एरिया की बढ़ोत्तरी होने से उत्पादन पिछले वर्ष के आसपास ही रहेगा। कच्ची फसल नहीं खुद पाने का खामियाजा किसान ही भुगतेंगे। अधिक उत्पादन से किसानों को खेतों पर अच्छा लाभ नहीं मिल पाएगा। जबकि व्यापारी बाद में भरपूर फायदा उठाएंगे।

तीन हजार हेक्टेयर बढ़ा ऐरिया
जिला उद्यान अधिकारी ने कहा कि प्रति हेक्टेयर इस वर्ष 250 से 300 कुंतल के बीच आलू निकल रहा है। उत्पादन में तो गिरावट आई है, लेकिन ऐरिया ने इसकी भरपाई कर दी है। पिछले वर्ष 45 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की बुआई हुई थी, जो कि इस बार 48 हजार हेक्टेयर रकवा पहुंच गया था। कहा कि मौसम की खराबी से किसानों को कोई विशेष नुकशान नहीं होगा। हलांकि खेत में इस बार आलू का भाव अच्छा मिलने की कम उम्मीद है।

करीब 25 फीसदी आलू शीतगृहों में पहुंचा
इस बार फरवरी माह के शुरुआती दिनों में मौसम की खराबी ने किसानों व शीतगृह मालिकों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। आलू भंडारित होने का कार्य करीब एक माह पिछड़ गया है। शीतगृहों में 20 से 25 फीसदी आलू भंडारित हो सका है।

शीतगृह मालिक सोनी मिश्रा ने कहा कि भंडारण में इस बार भी कोई विशेष दिक्कत नहीं आएगी। उत्पादन सही निकल रहा है। शीतगृह मालिक आशीष कपूर ने कहा कि आलू की खुदाई मौसम के कारण प्रभावित हो गई थी। इस कारण आलू कोल्ड स्टोर्स में देरी से पहुंचा है।

रैक प्वाइंट न मिलने से होगा नुकसान
जिले में रैक प्वाइंट स्थापित कराए जाने के लिए पिछले कई सालों से मांग की जा रही है, लेकिन किसानों की यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। जिसका खामियाजा किसानों को आलू के सीजन में प्रत्येक वर्ष भुगतान पड़ता है। वाया रोड आलू ले जाने पर किसानों को बचत कम मिलती है। जबकि ट्रेन के माध्यम से आलू दूसरे प्रदेशों में ले जाने पर काफी बचत मिलती है।

आलू खुदाई मशीन ने रोजगार छीना
आलू मशीन ने किसानों के हाथों से काफी हद तक रोजगार छीना है। अधिकतर बड़े किसान आलू की खुदाई के लिए मशीन का उपयोग कर रहे हैं। मशीन के उपयोग से लेवरों की कम संख्या में जरुरत पड़ती है। हलांकि आलू मशीन से खुदाई से किसानों को घाटा भी है। मशीन से आलू खोदने पर काफी मात्रा में आलू खेत में ही छूट जाता है, जो कि बिनाई के दौरान पूरा नहीं बिन पाता है।
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