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Kannauj News: आलू के दाम औंधे मुंह गिरे, लागत भी मुश्किल से वसूल

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कन्नौज। आलू की फसल को लेकर किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस वर्ष आलू के भावों में भारी गिरावट आई है जिसके चलते किसानों के लिए अपनी लागत निकालना भी कठिन हो गया है। स्थानीय मंडी में सफेद आलू 150 से 280 रुपये प्रति पैकेट की दर से बिक रहा है। वहीं लाल आलू भी 300 से 400 रुपये प्रति पैकेट तक सीमित रह गया है। इस स्थिति का सबसे अधिक प्रभाव उन किसानों पर पड़ा है, जिन्होंने मक्का जैसी अन्य फसलों की बोआई के बजाय आलू की खेती को प्राथमिकता दी थी। उन्हें अपनी उपज को औने-पौने दामों में बेचने पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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व्यापारियों का कहना है कि बाजार में आलू की आवक सामान्य है पर मांग कमजोर है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। आलू की खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरों पर काफी खर्च आता है। उचित मूल्य न मिलने पर यह पूरा निवेश डूब जाता है। किसानों का कहना है कि इस वर्ष उन्होंने आलू की खेती से अच्छी आमदनी की उम्मीद की थी, लेकिन बाजार की वर्तमान स्थिति ने सारी आशाओं पर पानी फेर दिया है।
फोटो :39: आलोक गुप्ता।

मांग में कमी से दामों पर असर
गल्ला आलू व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष आलोक गुप्ता के अनुसार, आलू के दामों में गिरावट का मुख्य कारण बाजार में आवक के मुकाबले मांग का कम होना है। बाहरी प्रदेशों से मांग न रहने के कारण आलू की खपत केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित है। इस वर्ष आलू का बंपर उत्पादन हुआ है, जिससे मंडी में आवक बढ़ी है। कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू के दामों में भी स्थिरता नहीं आ पा रही है, जिससे किसानों को भंडारण का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है।
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फोटो :40: सुखेंद्र प्रताप सिंह।
अन्य राज्यों से भी हो रही आपूर्ति
आलू व्यापारी सुखेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आलू की आवक लगातार बनी हुई है, लेकिन उपभोक्ता स्तर पर मांग अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। इसके अतिरिक्त, अन्य राज्यों से भी आलू की आपूर्ति हो रही है, जिससे स्थानीय बाजार पर दबाव बढ़ा है। व्यापारियों की कोशिश है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, लेकिन बाजार की अपनी मजबूरियां हैं।
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