कथा सुनाते आचार्य प्रेम सागर पांडे।
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जीवों में मानव जीवन सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन मानव शरीर मिलने के बाद लोग समाज के प्रति अपने दायित्व और कर्तव्यों को भूल जाते हैं। वे लोभ व मोह में फंसकर सब कुछ गंवा देते हैं। संसार में भटकते रहते हैं। ये बात कथावक आचार्य प्रेम सागर पांडेय ने काजीपुरवा बलई में भक्तों के बीच कही। इस दौरान वृंदावन से आए कलाकारों ने झांकी प्रस्तुत की। कथा के पांचवें दिन काजीपुरवा गांव में आचार्य प्रेम सागर पांडेय ने कहा कि पृथ्वी पर कंस का पापाचार फैला हुआ है।
गायाें का वध हो रहा है। हमारे गंगा-यमुना के पवित्र क्षेत्र त्राहि-त्राहि मची हुई है। इन सभी पर तभी रोक लगेगी जब मनुष्य समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझे और उनका निर्वाहा करे। ताकि समाज के पाप और अत्याचार का विनाश हो सके। इसी क्रम में उन्होंने कहा कि बिना ईश्वर की भक्ति के मन की शांति नहीं मिलती है। मानव मोह, माया में फंसकर भटकता रहता है। प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन कुछ समय ईश्वर की आराधना में अवश्य केंद्रित करना चाहिए।
इससे मन की शांति मिल सके। कथा श्रवण के दौरान देवेंद्र कुमार कुशवाहा, अनिल कुमार कुशवाहा, बाबा पिंकू, शेखर कुशवाहा, हर्षित, शिवम, पवन, परमान्नद, रजत, मोनूू पाल, आशीष पाल दीपू पाल, अमित पाल, सुरजीत पाल आदि मौजूद रहे।