चकबंदी के लिए निर्देश देते अधिकारी
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क्षेत्र की 34 ग्राम पंचायतों के कई साल पहले जल चुके चकबंदी अभिलेखों के बाद अब सरकार की नजरें इनपर इनायत हो ही गई हैं। शासन के निर्देश पर चकबंदी आयुक्त ने दस जले हुए गांवों में नए सिरे से चकबंदी कराने के आदेश दिए हैं। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इलाहाबाद से गजट आते ही इन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
क्षेत्र की 34 ग्राम पंचायतों के चकबंदी अभिलेख जले होने के कारण किसानों के सामने कई तरह की समस्याएं थी। लोगों ने इसकी शिकायत शासन स्तर तक की थी। पिछले कई सालों से प्रस्ताव राजस्व परिषद लखनऊ में लंबित था। किसानों की समस्याओं को देखते हुए चकबंदी आयुक्त लखनऊ डॉ. हरीओम ने क्षेत्र के नंदलालपुर, कुंवरपुर बनवारी, करनौली, अकबरपुर, उस्मानपुर, मेरापुर गढ़िया, हाथिन, सरदामई, बरूआ सबलपुर, गढ़ियापाह में जोत चकबंदी अधिनियम 1953 की धारा चार के तहत नए सिरे से चकबंदी कराने के आदेश दिए हैं।
इन गांवों की पत्रावली अभी चकबंदी निदेशालय में है। वहीं, गजट इलाहाबाद में प्रकाशित कराने के लिए सरकारी प्रेस में भेजा गया है। चकबंदी अधिकारी तिर्वा वीपी श्रीवास्तव ने बताया कि जैसे ही गजट उपलब्ध होगा, चकबंदी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले इस संदर्भ में विभागीय और प्रशासनिक उच्चाधिकारियों के साथ बैठककर रूपरेखा तैयार की जाएगी। इसके बाद गांव वाइज चकबंदी शुरू कराई जाएगी।
विदित हो कि तहसील क्षेत्र की 34 ग्राम पंचायतों के चकबंदी अभिलेख वर्ष 1990 में फतेहगढ़ स्थित अभिलेखाकार में लगी रहस्यमय आग में जलकर नष्ट हो गए थे। उस समय इन गांवों में धारा 48 (निगरानी के मुकदमे) की कार्रवाई चल रही थी। केवल धारा 52 का प्रकाशन होना शेष रह गया था। चकबंदी के अभिलेख जले होने के कारण इन गांवों के किसान मुख्य धारा से दूर हो गए थे और उनके बैनामा व किसान क्रेडिट कार्ड सहित कई शासकीय काम व योजनाओं के लाभ नहीं मिल पा रहे थे। अब दस गांवों में चकबंदी का रास्ता खुलने से किसानों में उम्मीदें जगी हैं।