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पौधों की देखरेख न होने से तीन करोड़ का नुकसान

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तेराजाकेट मलिकपुर रोड पर देखरेख के अभाव में सूखे पौधे। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। वन विभाग लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। कर्मचारियों की कमी से वन संपदा की हिफाजत नहीं हो पा रही है। हर साल लगाए जाने वाले पौधे देखरेख के अभाव में सूख जाते हैं। पिछले साल सूखने वाले पौधों के हिसाब से तीन करोड़ के आसपास नुकसान हुआ है। इसके साथ ही जंगल में शिकार की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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जिले में जिला वन अधिकारी समेत कर्मचारियों के 71 पद हैं। महज 30 कर्मचारियों की तैनाती है। 41 कर्मचारियों के पद करीब पांच साल से रिक्त हैं। कर्मचारियों की कम संख्या से पौधों की देखभाल नहीं हो पाती है। इससे हर साल लगने वाले ज्यादातर पौधे सूख जाते हैं। पिछले साल जिले में 26 लाख दो हजार 802 पौधे रोपने का दावा किया गया। इनमें करीब 20 लाख पौधे चल सके। एक पौधे की कीमत और लागत करीब 50 रुपये बैठती है। 6 लाख के ऊपर पौधे सूखने से नुकसान का आंकड़ा तकरीब तीन करोड़ के आसपास बैठता है। इस बार 2021-22 में 28 लाख 82 हजार 25 पौधो को रोपित करने की विभाग तैयारी कर रहा है। पुराने रिकार्र्ड को देखते हुए इस दफा भी मोटा पैसा बर्बाद होगा। वहीं कम संख्या से कर्मचारी जद्दोजहद कर रहे हैं। लाख बहोसी पक्षी विहार समेत अन्य जंगलों में प्रतिबंधित पशुओं और पक्षियों का शिकार भी हो रहा है। जिला वन अधिकारी जवाहर लाल गुप्ता ने बताया कि महकमे में कर्मचारियों की बेहद कमी है। कई बार शासन को पत्र लिखकर तैनाती की मांग की गई। अभी तक सुनवाई नहीं हुई।
हाईवे चौड़ीकरण में कट गए काफी पेड़
पेड़-पौधों का पतन हो रहा है। मौजूदा समय जिले में 2.86 फीसदी इलाके में पेड़-पौधे हैं। इसमें वन विभाग की करीब चार हजार हेक्टेयर भूमि शामिल है। जिला वन अधिकारी जवाहर लाल गुप्ता ने बताया कि लोग वनों को काट कर खेत बना रहे हैं। हाईवे चौड़ीकरण में काफी पेड़ कट गए। इससे वन संपदा में गिरावट आई है।
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बड़ी तादाद में हो रहा बेजुबानों का शिकार
जिले में बड़ी तादाद में बेजुबानों का शिकार हो रहा है। तालग्राम इलाके में रोजाना अति दुर्लभ साही का शिकार होता है। 2020 में आठ शिकारियों को गिरफ्तार कर जेला भेजा गया था। लाख बहोसी पक्षी विहार के आसपास भी विदेशों से आने वाले पक्षियों का शिकार कर तस्करी की जाती है। वन कर्मियों की कम संख्या के चलते गश्त नहीं हो पाता है।
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