फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पटरी पर लौटे इत्र कारखाने, फूलों के दाम चढ़ने लगे

विज्ञापन
विज्ञापन
कन्नौज/जलालपुर। लॉकडाउन के बाद अब धीरे-धीरे इत्र कारोबार पटरी पर लौटने लगा है। करीब 350 इत्र कारखानों में 80 फीसदी इत्र का उत्पादन शुरू हो गया है। इससे बेला, गुलाब और मेहंदी के दामों में उछाल है। आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे फूलों की खेती करने वाले करीब 50 हजार किसानों के चेहरों पर अब मुस्कान नजर आने लगी है।
विज्ञापन

जिले में बेला, गुलाब और मेहंदी के फूलों के साथ-साथ ग्लेडियोलस, रातरानी, चमेली, लेमन ग्रास की अच्छी पैदावार होती है। कारखानों में इनसे इत्र तैयार किया जाता है। यहां के फूलों से बना इत्र फ्रांस, ब्रिटेन, अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूथोपिया, इंग्लैंड, दक्षिण चीन, साइबेरिया और सिंगापुर निर्यात होता है। व्यापारिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 से शहर में इत्र का कारोबार करीब 6000 करोड़ रुपये सालाना है। कोरोना काल में लॉकडाउन से कारोबार को झटका लगा। अनलॉक में अब कारोबार पटरी पर आने लगा है। शहर में करीब 350 छोटे-बड़े इत्र कारखानों में 80 फीसदी उत्पादन शुरू हो गया है। इससे अभी तक 40 रुपये में बिकने वाले बेला की कली अब 120 रुपये किलो और फूल 300 रुपये तक बिकने लगा है। गुलाब 70 से 80 रुपये किलो बिक रहा है। मेहंदी का फूल 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रहा है। लॉकडाउन के दौरान खेतों में खिलकर झड़े फूलों से किसानों के चेहरे मुरझा गए थे। फूलों के दाम बढ़ने से अब इनमेें खुशी है।
इत्र एवं अतर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पवन त्रिवेदी ने बताया कि अभी पूरी तरह से इत्र कारखानों में उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। करीब 15 से 20 दिन बाद उत्पादन बढ़ने के साथ फूलों के दामों में और इजाफा होगा। जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि इत्र कारोबार शुरू होने से फूलों के दाम बढ़ने लगे हैं। बरसात के कारण गुलाब और बेला की आवक कम हो रही है। बरसात के बाद अक्तूबर से बंपर पैदावार होने लगेगी।
विज्ञापन

फूलों की खेती पर एक नजर
सदर तहसील में 523 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती है।
छिबरामऊ तहसील में 350 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती है।
तिर्वा तहसील में करीब 90 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती है।
एक बीघा में तीसरे दिन 20 किलो गुुलाब का फूल निकलता है।
एक बीघा में बेला की कली 10 किलो और फूल तीन किलो निकलते हैं।
एक बीघा मेहंदी की फसल में तीन दिन में करीब 20 किलो फूल निकलता है।
जिले से 80 फीसदी फूलों की बिक्री स्थानीय और 20 फीसदी बाहर होती है।
जिले के इन गांवों में होती फूलों की खेती
जिला मुख्यालय से सटे गांव जलालपुर पनवारा, महमूदपुर पैड, खिम्मापुरवा, रत्नापुर, भाऊ खुर्द, सारोतोप, फिरोजपुर, वाहपुर, निवाजीपुरवा, भाटमपुर सरैया, रोहनपुर्वा, खिदरियापुर, पैंदाबाद, बंधवा, भवानीपुर, बसीरापुर, देवधरापुर, रामपुर, खैरनगर, महाबलीपुर, तहसीपुर, गंगा कटरी बरौली, शरीफापुर और छिबरामऊ के प्रेमपुर, सरायगोपाल, छिपारी, माधौनगर, टडहा, मनिकापुर, श्यमपुर, मिघौला, मिघौली, नगला दुर्गा, मटेहना, सबलपुर, नगला, भजा, हाबलीपुर्वा में फूलों की खेती बड़े पैमाने पर होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें