पिछले साल 26 हजार डिलीवरी पर 15 महिलाओं की हुई मौत
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जिले भर के पीएचसी केंद्रों की हालत ठीक नहीं है। केंद्रों पर मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। उन्हें तिर्वा के मेडिकल कालेज या जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है। वहीं ब्लाक जलालाबाद में एक वर्ष से महिला विंग का भवन बनकर तैयार है। स्टाफ के अभाव में महिलाआें को सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जलालाबाद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में चार करोड़ 83 लाख रुपये की लागत से बना पचास शैय्या का महिला चिकित्सालय अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इससे महिला मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
छह माह से ज्यादा समय से भवन बनकर तैयार है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आनंद ने बताया कि जिले में स्टाफ की कमी से महिला विंग बंद पड़ा है। वहीं स्थानीय लोगाें का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि नई सरकार में इस विंग का भी शुभारंभ हो जाएगा। इससे क्षेत्र की महिलाओं को आसानी से इलाज उपलब्ध हो जाएगा।
एक्सरे नहीं होगा लेकिन टेक्नीशियन की तैनाती
जलालाबाद। सुविधाओं के नाम पर यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर न तो एक्सरे मशीन है और न ही अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था। मरीज की कोई जांच नहीं हो पाती है। इसके बाद भी विभाग ने एक्सरे टेक्नीशियन की तैनाती कर दी है। सुविधाएं न होने से मरीजों को जिला अस्पताल, मेडिकल कालेज, सीएचसी गुरसहायगंज रेफर कर दिया जाता है। इमरजेंसी सेवा भी बदहाल है। यहां कोई डाक्टर कभी उपलब्ध नहीं रहता है।