कन्नौज। जिला अस्पताल में इलाज मरीजों के लिए मुसीबत बन रहा है। डायरिया पीड़ितों को लगाया जाने वाला रिंगर लैक्टेट इंजेक्शन (आरएल) साइड इफेक्ट दे रहा है। इंजेक्शन लगते ही मरीजों को कंपकंपी छूट जाती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सप्लाइज कार्पोरेशन से भेजी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहा है।
उल्टी दस्त होने के साथ ही कई अन्य बीमारियों से शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। ऐसे मरीजों की हालत जल्दी बिगड़ती है। आनन-फानन ही मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जाता है। अस्पताल में ऐसे मरीजों को सबसे पहले आरएल ही दिया जाता है। दरअसल शरीर में तरल पदार्थों की कमी को पूरा करने और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखने में आरएल काफी उपयोगी है, लेकिन इसका इस्तेमाल इन दिनों मुसीबत का सबब बन रहा है। संवाद
जिला चिकित्सालय में रोकी गईं 1700 बोतलें
जिला चिकित्सालय को मार्च में वेयर हाउस से करीब 4000 रिंगर लैक्टेट इंजेक्शन (आरएल) की आपूर्ति की गई थी, लेकिन शिकायत आने पर पुराने आरएल के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है। मौजूदा वक्त जिला चिकित्सालय में करीब 1700 आरएल की बोतलें रखी हुई हैं।
डायरिया से पीड़ित राजेश्वरी (62) को तीन दिन पहले परिजनों ने जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। मेडिसन वार्ड में उसे चिकित्सक की राय पर आरएल चढ़ाई गई। कुछ देर बाद ही राजेश्वरी को कंपकंपी होने लगी।
खुशी को दो दिन पहले डायरिया हो गया था। जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान आरएल चढ़ाया गया। आरएल चढ़ाए जाने के फौरन बाद उसे ठंड लगने लगी।
सीएमओ डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि अस्पतालों में भर्ती कुछ मरीजों को आरएल चढ़ाने पर राइगर (कंपकंपी) की शिकायत आई थी। कार्पोरेशन को शिकायत दर्ज कराकर जांच के लिए नमूने भेजे जा चुके है।
वेयर हाउस प्रभारी मंजुल कटियार ने बताया कि मेडिकल सप्लाइज कार्पोरेशन की ओर से रिंगर लैक्टेट इंजेक्शन (आरएल) की 40 बोतल जांच के लिए मांगी गई थी। जांच के लिए नमूने भेजे जा चुके हैं। आरएल के पुराने बैच नंबर की खेप की सप्लाई को रोक दिया गया है।
शासन ने जांच के लिए मांगें सैंपल और मरीजों की लिस्ट
वेयर हाउस के प्रभारी मंजुल कटियार ने उप्र मेडिकल सप्लाइज कार्पोरेशन लिमिटेड को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज करा दी। अब विस्तृत जांच के लिए कार्पोरेशन के गुणवत्ता नियंत्रण प्रबंधक की ओर से वेयर हाउस प्रभारी से आरएल की 40 सील बंद बोतल और आरएल लगने से कंपकंपी का शिकार होने वाले कुछ मरीजों की सूची मांगी गई है।
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सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति के लिए उप्र मेडिकल सप्लाइज कार्पोरेशन लिमिटेड बनाया गया है। इसके तहत ड्रग एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से अस्पतालों की जरूरत के अनुसार ऑनलाइन आर्डर लेकर दवाएं भेजी जाती हैं। वेयर हाउस में दवाएं आने के बाद इन दवाओं के सैंपल को जांच के लिए लखनऊ की प्रयोगशाला में भेजा जाता है। रिपोर्ट आने के बाद वेयर हाउस को दवाओं की सप्लाई करने की छूट दी जाती है।