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पांच दशक से परशुराम की भूमिका निभा रहे हैं राकेश

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परशुराम के किरदार में राकेश - फोटो : KANNAUJ
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तिर्वा(कन्नौज)। कस्बे के राकेश कुमार पांच दशक से परशुराम का किरदार निभा रहे हैं। उनके मंचन को देखने के लिए दर्शक उत्साहित रहते हैं। यह राकेश की लोकप्रियता है कि साथी शिक्षक उन्हें परशुराम कहकर बुलाते हैं।
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अशोक नगर वार्ड निवासी राकेश कुमार कस्बे के डीएन इंटर कालेज में हिंदी व संस्कृत विषय के प्रवक्ता पद पर तैनात हैं। वह पांच वर्ष की उम्र से रामलीला में किरदार निभा रहे हैं। सबसे पहले वानर सेना में शामिल हुए थे। इसके बाद लक्ष्मण का किरदार निभाया। राकेश कुमार ने बताया कि बाबा पंडित कुंदनलाल व पिता विद्या प्रकाश वैद्य भी रामलीला में मंचन करते थे। तिर्वा रियासत के दौरान पिता तिर्वा में होने वाली रामलीला में परशुराम का मंचन करते थे। उनके साथ वह भी भूमिकाएं करने लगे।
राकेश कुमार के मुताबिक उनका परशुराम का किरदार निभाने का मन होता था। उन्हें यह किरदार विरासत में मिला है। 1990 में प्रवक्ता पद पर तैनात होने के बाद भी रामलीला में मंचन नहीं छोड़ा। दिन में स्कूल में पढ़ाते थे। रात में रामलीला में मंचन करते थे।
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राकेश कुमार ने बताया कि पिता के साथ भी रामलीला में मंचन किया है। उन्होंने रावण और लक्ष्मण का भी किरदार निभाया। राकेश कुमार कहते हैं, पैसे के लिए रामलीला में काम नहीं किया। हिंदू संस्कृति को जिंदा रखने के लिए मंचन करते हैं। जब तक शरीर में ताकत है, वह किरदार निभाते रहेंगे। वह कहते हैं कि लोगों के विरोध न करने पर अन्याय बढ़ता है। समाज पीड़ित होता है तब परशुराम का जन्म होता है।
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